अगस्त 2026 में भारतीय प्राइमरी मार्केट में ऐतिहासिक तेजी देखी गई है। कुल **23** IPO आए, जिनमें से **10** को **100** गुना से ज्यादा सब्सक्राइब किया गया। औसत लिस्टिंग गेन **28%** तक पहुंच गया है, लेकिन निवेशकों को सेकेंडरी मार्केट की अस्थिरता के बीच सतर्क रहने की जरूरत है।
भारतीय प्राइमरी मार्केट में अगस्त 2026 में साल 2006 के बाद सबसे जबरदस्त हलचल देखी गई। एक्सचेंज डेटा के अनुसार, इस महीने 23 कंपनियों ने अपने IPO लॉन्च किए। खास बात यह रही कि इनमें से 10 कंपनियों के शेयर 100 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुए। यह तेजी तब आई जब BSE Sensex और NSE Nifty 50 जैसे इंडेक्स उतार-चढ़ाव का सामना कर रहे थे।
सब्सक्रिप्शन के बादशाह और फंड
रिटेल और इंस्टीट्यूशनल निवेशकों की भारी दिलचस्पी के बीच Hy-Tech Engineers का सब्सक्रिप्शन 244.41 गुना रहा। वहीं, Tempsens Instruments India 183.53 गुना और ESDS Software Solutions 135.88 गुना सब्सक्राइब हुआ। इस पूरे महीने में कुल ₹23,000 करोड़ की पूंजी जुटाई गई।
Dhoot Transmission ने अपने IPO से ₹3,066.89 करोड़ जुटाए और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर 37.77% के प्रीमियम के साथ लिस्ट होकर शानदार आगाज किया। अगस्त में लिस्ट हुए शेयरों ने औसतन 28% का मुनाफा दिया, जो साल के पहले सात महीनों के 5.6% औसत के मुकाबले कहीं ज्यादा है।
मार्केट में 'डिस्कनेक्ट' और आगे की चुनौती
मौजूदा तेजी से साफ है कि नए शेयर भारी मोमेंटम में हैं, जबकि पुराने स्टॉक्स पर मैक्रो-इकोनॉमिक अनिश्चितता का दबाव है। हालांकि, हाई सब्सक्रिप्शन का मतलब हमेशा बेहतर फंडामेंटल नहीं होता, यह कई बार सट्टेबाजी का भी संकेत हो सकता है।
बाजार में अभी 239 से अधिक कंपनियों की पाइपलाइन है, जिसमें NSE और Jio Platforms जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इतनी ज्यादा संख्या में IPO आने से मार्केट सैचुरेशन और निवेशकों में 'सब्सक्रिप्शन फटीग' का रिस्क भी बढ़ रहा है। निवेशकों को सलाह है कि वे केवल सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों को न देखें, बल्कि कंपनी के लॉन्ग-टर्म बिजनेस मॉडल और मैनेजमेंट की भविष्य की योजनाओं पर भी ध्यान दें।
