Ardee Industries का **₹425.87 करोड़** का IPO अलॉट हो गया है! कंपनी **133.66 गुना** सब्सक्राइब हुई। शेयर **11 अगस्त** तक डीमैट अकाउंट में आ जाएंगे और **12 अगस्त** को मार्केट में लिस्ट होंगे। पर IPO में पैसा लगाने वाले ध्यान दें, कंपनी कुछ बड़े ग्राहकों पर बहुत ज़्यादा निर्भर है और उसे वर्किंग कैपिटल की भी ज़रूरत है।
Ardee Industries IPO: अलॉटमेंट फाइनल, लिस्टिंग की तारीख तय!
Ardee Industries ने अपने ₹425.87 करोड़ के IPO के लिए अलॉटमेंट की प्रक्रिया 10 अगस्त, 2026 को फाइनल कर दी है। 7 अगस्त को बंद हुए इस ज़बरदस्त सब्सक्रिप्शन वाले इशू के बाद, कंपनी अब BSE और NSE पर 12 अगस्त, 2026 को मार्केट में डेब्यू करने की तैयारी में है।
निवेशकों का ज़बरदस्त रिस्पॉन्स
पब्लिक इशू को सभी कैटेगरी के इन्वेस्टर्स से ज़बरदस्त डिमांड देखने को मिली। कुल मिलाकर, यह इशू 133.66 गुना सब्सक्राइब हुआ। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) कैटेगरी में सबसे ज़्यादा 255.24 गुना सब्सक्रिप्शन आया, जबकि रिटेल इन्वेस्टर्स ने 45.71 गुना अप्लाई किया। वहीं, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) ने भी 197.77 गुना सब्सक्रिप्शन के साथ मज़बूत दिलचस्पी दिखाई। पब्लिक लॉन्च से पहले ही, कंपनी ने एंकर इन्वेस्टर्स से भी पैसा जुटा लिया था, जिसमें Bank of India Small Cap Fund और Bharat Value Fund जैसे फंड्स शामिल थे।
कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ
फाइनेंशियल ईयर 2026 में, Ardee Industries ने ₹1,167.65 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जिसमें ₹84.68 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) और 12.60% का EBITDA मार्जिन रहा। कंपनी इस नए फंड का ज़्यादातर हिस्सा, यानी करीब ₹220 करोड़, अपने वर्किंग कैपिटल की ज़रूरतें पूरी करने में लगाएगी। वहीं, ₹20 करोड़ कर्ज चुकाने के लिए रखे गए हैं। बाकी बचे पैसों का इस्तेमाल जनरल कॉर्पोरेट पर्पज़ के लिए किया जाएगा।
IPO में पैसा लगाने से पहले ये रिस्क ज़रूर जान लें
लिस्टिंग से पहले, इन्वेस्टर्स को कंपनी से जुड़े कुछ खास बिजनेस रिस्क पर ध्यान देना चाहिए। सबसे बड़ी चिंता है कस्टमर कंसंट्रेशन। कंपनी का टॉप कस्टमर उसके रेवेन्यू का लगभग 40.64% हिस्सा देता है। इतना ही नहीं, टॉप 10 कस्टमर्स से ही 91% से ज़्यादा की बिक्री होती है, जिससे कंपनी इन खास क्लाइंट्स की परफॉर्मेंस और खरीद फैसलों पर बहुत ज़्यादा निर्भर हो जाती है।
इसके अलावा, यह बिजनेस वर्किंग-कैपिटल इंटेंसिव है और इसे लीड स्क्रैप की लगातार ज़रूरत पड़ती है। यह कंपनी को कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट व एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (EPR) से जुड़े रेगुलेटरी बदलावों के जोखिम में डालता है। कंपनी का मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन भी सिर्फ एक राज्य, आंध्र प्रदेश, में ही केंद्रित है, जो एक ऑपरेशनल रिस्क बढ़ाता है।
आगे क्या?
सफल एप्लीकेंट्स के शेयर 11 अगस्त, 2026 तक उनके डीमैट अकाउंट में क्रेडिट हो जाएंगे। जिन एप्लीकेंट्स को शेयर नहीं मिले हैं, उनके रिफंड का प्रोसेस भी उसी दिन पूरा हो जाएगा। जैसे-जैसे स्टॉक ट्रेडिंग के लिए तैयार हो रहा है, निवेशकों का ध्यान इस बात पर रहेगा कि कंपनी अपनी कस्टमर डिपेंडेंसी को कैसे मैनेज करती है और क्या वह कच्चे माल की बढ़ती-घटती कीमतों के बीच अपने प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रख पाती है या नहीं।
