आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दिग्गज कंपनी Anthropic ने Nasdaq IPO के लिए फाइलिंग कर दी है, जिसकी वैल्यूएशन **$2 ट्रिलियन** तक जा सकती है। भारतीय निवेशकों के लिए सीधे निवेश में भौगोलिक सीमाएं और RBI के नियम बड़ी बाधा बन रहे हैं, जिसके कारण अब एक्सपर्ट्स 'प्रॉक्सी बेट्स' का सुझाव दे रहे हैं।
बाजार में एआई (AI) की बड़ी हलचल
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी Anthropic ने अमेरिकी रेगुलेटर्स के पास S-1 रजिस्ट्रेशन फाइल कर दिया है और कंपनी जल्द ही 'ANT' टिकर के साथ Nasdaq पर लिस्ट होने वाली है। मार्केट की चर्चाओं के मुताबिक, यह 16 नवंबर, 2026 के हफ्ते में मार्केट में दस्तक दे सकती है। कंपनी की ग्रोथ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2026 की पहली छमाही में ही इसका रेवेन्यू $16.3 बिलियन दर्ज किया गया है, जिसके चलते इसकी संभावित मार्केट वैल्यूएशन $1.5 ट्रिलियन से $2 ट्रिलियन के बीच आंकी जा रही है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या है पेच?
भारत के बड़े निवेशकों (UHNIs) के लिए इस IPO में सीधे हिस्सा लेना नामुमकिन है। कंपनी ने अपनी अंतरराष्ट्रीय एलोकेशन में भारत को जगह नहीं दी है। इसके अलावा, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की 'लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम' (LRS) के तहत एक व्यक्ति सालाना केवल $250,000 ही विदेश भेज सकता है, जो इतनी बड़ी कंपनी में निवेश के लिए काफी कम है।
अब विकल्प क्या है? (Proxy Bets)
सीधे निवेश का रास्ता बंद होने के कारण वेल्थ मैनेजर्स अब निवेशकों को 'प्रॉक्सी बेट्स' की सलाह दे रहे हैं। इसमें उन कंपनियों के शेयर खरीदना शामिल है, जो एआई इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा हैं:
- Amazon और Alphabet: ये कंपनियां Anthropic में बड़ी हिस्सेदार हैं और एआई के इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट करती हैं।
- सेमीकंडक्टर कंपनियां: Taiwan Semiconductor Manufacturing Co. और Samsung Electronics जैसे नाम एआई की सप्लाई चेन के लिए रीढ़ हैं, जो इस सेक्टर में एक्सपोजर पाने का एक सुरक्षित जरिया हो सकते हैं।
सावधानी भी जरूरी
निवेशकों को यह नहीं भूलना चाहिए कि कंपनी अभी भी भारी ऑपरेटिंग लॉस (Operating Loss) झेल रही है। इंफ्रास्ट्रक्चर और कंप्यूटिंग पर होने वाला भारी खर्च कंपनी के फाइनेंशियल लचीलेपन पर दबाव डाल रहा है। साथ ही, डेटा ट्रेनिंग को लेकर जारी कानूनी चुनौतियों का असर भी आने वाले समय में स्टॉक पर दिख सकता है।
