Annu Projects Listing: निवेशकों को लगा तगड़ा झटका! IPO प्राइस से **27%** नीचे लिस्ट हुआ शेयर

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Annu Projects Listing: निवेशकों को लगा तगड़ा झटका! IPO प्राइस से **27%** नीचे लिस्ट हुआ शेयर

Annu Projects की शेयर बाजार में शुरुआत बेहद निराशाजनक रही है। ₹99 के इश्यू प्राइस के मुकाबले यह शेयर NSE पर मात्र **₹72** पर खुला है। कंपनी के मजबूत ऑर्डर बुक के बावजूद खराब कैश फ्लो और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों ने निवेशकों को सतर्क रहने पर मजबूर कर दिया है।

Annu Projects की स्टॉक मार्केट में शुरुआत काफी कमजोर रही है। बुधवार को जब कंपनी के शेयर लिस्ट हुए, तो वे अपने इश्यू प्राइस ₹99 के मुकाबले काफी नीचे खुले। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर शेयर ₹72 पर लिस्ट हुआ, जो निवेशकों के लिए 27% का नुकसान है। वहीं, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर इसकी शुरुआत ₹75 पर हुई, जो इश्यू प्राइस से करीब 24% कम है।

ऑर्डर बुक बनाम कैश फ्लो की स्थिति

दिलचस्प बात यह है कि IPO के दौरान कंपनी को 2.93 गुना सब्सक्राइब किया गया था, लेकिन लिस्टिंग के दिन यह उत्साह गायब दिखा। कंपनी की वित्तीय सेहत की बात करें तो 30 जून 2026 तक इनके पास ₹1,005.05 करोड़ का मजबूत ऑर्डर बुक था। फाइनेंशियल ईयर 2026 के आंकड़ों को देखें तो कंपनी ने ₹241.24 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹33.02 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया था।

मार्केट में चिंता का सबसे बड़ा कारण कंपनी का 'वर्किंग कैपिटल साइकिल' है। FY26 में ग्राहकों से पेमेंट वसूलने में औसतन 237 दिन का समय लगा है। यानी, काम पूरा होने के बाद कंपनी को अपना पैसा वापस पाने में करीब आठ महीने का लंबा इंतजार करना पड़ता है।

इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की चुनौतियां

लंबा पेमेंट कलेक्शन और कैपिटल-इंटेंसिव बिजनेस होने के कारण कंपनी के कैश फ्लो पर भारी दबाव रहता है। IPO के जरिए जुटाई गई ₹175 करोड़ की राशि का इस्तेमाल कंपनी वर्किंग कैपिटल और नए उपकरणों की खरीद में करेगी, लेकिन निवेशकों को इस बात का डर है कि क्या यह रकम ऑपरेशनल गैप को भरने के लिए काफी होगी। इसके अलावा, सरकारी टेंडर और सरकारी पेमेंट में देरी का जोखिम हमेशा बना रहता है।

अब निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

शेयरधारकों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि क्या कंपनी अपने कैश कलेक्शन की रफ्तार बढ़ा पाती है। उधार पर निर्भरता कम करने और असल कैश जनरेट करने के लिए कलेक्शन टाइम को घटाना अनिवार्य है। साथ ही, कंपनी अपने ₹1,000 करोड़ से ज्यादा के ऑर्डर बुक को कितनी तेजी से रेवेन्यू में बदल पाती है, यह आने वाली तिमाहियों में स्टॉक का भविष्य तय करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.