इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Annu Projects Limited अपना ₹175.06 करोड़ का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) 25 अगस्त, 2026 को खोलेगी। शेयर का प्राइस बैंड ₹94–99 प्रति शेयर तय किया गया है। कंपनी अपने वर्किंग कैपिटल को मजबूत करने के लिए फंड जुटा रही है, जिसका ऑर्डर बुक ₹1,000 करोड़ से अधिक है।
₹175 करोड़ का IPO ला रही Annu Projects
इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कंपनी Annu Projects Limited पब्लिक मार्केट में दस्तक देने के लिए तैयार है। कंपनी का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) 25 अगस्त, 2026 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा और 28 अगस्त, 2026 तक खुला रहेगा। इसके शेयर 2 सितंबर, 2026 को BSE और NSE पर लिस्ट होने की उम्मीद है।
कंपनी ने प्रति इक्विटी शेयर के लिए ₹94 से ₹99 का प्राइस बैंड तय किया है। रिटेल निवेशकों के लिए कम से कम 151 शेयरों के लिए बोली लगानी होगी, जिससे ऊपरी प्राइस बैंड पर न्यूनतम आवेदन राशि ₹14,949 हो जाती है। यह ₹175.06 करोड़ का इश्यू पूरी तरह से फ्रेश इक्विटी शेयरों का ऑफर है, जिसका मतलब है कि सारा पैसा सीधे कंपनी को मिलेगा, न कि मौजूदा शेयरधारकों को।
मजबूत ऑर्डर बुक और वित्तीय स्थिति
Annu Projects टेलीकॉम फाइबर ऑप्टिक्स, सीवरेज सिस्टम, गैस पाइपलाइन और रेलवे सिग्नलिंग जैसे विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम करती है। मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए, कंपनी ने ₹241.24 करोड़ का रेवेन्यू और ₹33.02 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था।
EPC सेक्टर में निवेशकों के लिए ऑर्डर बुक एक महत्वपूर्ण पैमाना है। 30 जून, 2026 तक, Annu Projects के पास ₹1,005.05 करोड़ की ऑर्डर बुक थी। यह कंपनी के आने वाले समय के रेवेन्यू की अच्छी तस्वीर पेश करता है।
फंड का इस्तेमाल
कंपनी जुटाए गए फंड का लगभग ₹115 करोड़ अपने वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल करेगी। EPC बिजनेस में अक्सर प्रोजेक्ट शुरू करने और क्लाइंट से पेमेंट मिलने के बीच समय का गैप होता है, ऐसे में वर्किंग कैपिटल फंड्स यह सुनिश्चित करते हैं कि रोजाना के ऑपरेशंस सुचारू रूप से चलते रहें।
इसके अतिरिक्त, ₹15 करोड़ का इस्तेमाल नई मशीनरी और इक्विपमेंट खरीदने में होगा, जबकि बाकी बचे फंड्स का उपयोग जनरल कॉर्पोरेट पर्पसेज के लिए किया जाएगा।
जोखिम और ध्यान देने योग्य बातें
EPC सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों के लिए कुछ जोखिम भी हैं। कंपनी की सरकारी या पब्लिक सेक्टर क्लाइंट्स पर निर्भरता एक प्रमुख चुनौती है। अगर इन क्लाइंट्स से पेमेंट में देरी होती है, तो कंपनी को कैश फ्लो की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
इसके अलावा, EPC प्रोजेक्ट्स में प्रॉफिट मार्जिन काफी पतला होता है। कच्चे माल जैसे स्टील, सीमेंट की कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित कर सकता है, खासकर अगर कंपनी कॉन्ट्रैक्ट्स में मूल्य समायोजन के माध्यम से इन लागतों को क्लाइंट्स पर पास ऑन नहीं कर पाती है। साथ ही, कंपनी का रेवेन्यू टेलीकॉम और सीवरेज जैसे कुछ खास सेक्टर्स पर केंद्रित है, इसलिए इन इंडस्ट्रीज में कोई भी रेगुलेटरी बदलाव या मंदी भविष्य के विकास को प्रभावित कर सकती है।
IPO में भाग लेने वाले निवेशक कंपनी की प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन टाइमलाइन को बनाए रखने और आने वाली तिमाहियों में अपने रिसीवेबल्स को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने की क्षमता पर नजर रख सकते हैं।
