सितंबर 2026 में 21 हालिया लिस्टेड कंपनियों के एंकर इन्वेस्टर्स का 30-दिन का लॉक-इन पीरियड खत्म हो रहा है। इससे बाजार में ₹5,742 करोड़ के शेयर्स की बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।
सितंबर का महीना प्राइमरी मार्केट के लिए काफी हलचल भरा रहने वाला है। हाल ही में लिस्ट हुई 21 कंपनियों के एंकर इन्वेस्टर्स का 30-दिन का अनिवार्य लॉक-इन पीरियड समाप्त हो रहा है। इसका मतलब है कि लगभग ₹5,742 करोड़ मूल्य के शेयर्स अब ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हो जाएंगे, जिससे बाजार में लिक्विडिटी के साथ-साथ उतार-चढ़ाव (volatility) भी बढ़ने की संभावना है।
एंकर लॉक-इन और जोखिम
जब कोई कंपनी IPO लाती है, तो एंकर इन्वेस्टर्स को शेयर अलॉट किए जाते हैं, जिसके बदले उन्हें एक निश्चित समय तक होल्डिंग बनाए रखनी होती है। नियम के अनुसार, 50% शेयर्स 30 दिन के लिए और बाकी 50% शेयर्स 90 दिन के लिए लॉक होते हैं। जैसे-जैसे सितंबर में ये 30 दिन की समयसीमा पूरी होगी, बाजार में इन शेयर्स की सप्लाई बढ़ जाएगी। अगर एंकर इन्वेस्टर्स मुनाफावसूली (profit booking) करते हैं, तो शेयरों की कीमतों पर दबाव दिख सकता है, बशर्ते कि बाजार में उतनी डिमांड न हो।
बाजार का हाल और वॉचलिस्ट
अगस्त में 21 मेनबोर्ड IPOs के जरिए कुल ₹21,000 करोड़ जुटाए गए थे, जिसके कारण यह अनलॉक इवेंट बड़ा हो गया है। Manipal Health Enterprises का लॉक-इन 2 सितंबर, 2026 को खत्म हो चुका है, जबकि Dhoot Transmission जैसे शेयरों की तारीख 15 सितंबर के आसपास है।
हालांकि, हर लॉक-इन समाप्ति का मतलब बिकवाली नहीं होता। कई लंबी अवधि के निवेशक कंपनी के फंडामेंटल्स पर भरोसा जताते हुए होल्डिंग बनाए रखते हैं। निवेशकों को सलाह है कि वे ट्रेडिंग वॉल्यूम पर नजर रखें; यदि सुबह के सत्र में बड़े ब्लॉक डील्स दिखते हैं, तो समझें कि एंकर इन्वेस्टर्स बिकवाली कर रहे हैं। Nifty 50 और Sensex में अगस्त की गिरावट के बाद, बाजार में सतर्कता जरूरी है, लेकिन ध्यान रखें कि टेंपरेरी सप्लाई प्रेशर और कंपनी के वास्तविक परफॉर्मेंस में फर्क होता है।
