Snapdeal की पैरेंट कंपनी Acevector की शेयर बाजार में शुरुआत बेहद निराशाजनक रही। कंपनी का शेयर अपने **₹32** के IPO प्राइस के मुकाबले करीब **12%** की भारी गिरावट के साथ **₹28.30** पर लिस्ट हुआ, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा है।
बाजार में सुस्त शुरुआत
Acevector Ltd की स्टॉक एक्सचेंज पर एंट्री काफी संघर्षपूर्ण रही। कंपनी के शेयर BSE पर ₹28.30 और NSE पर ₹28.32 पर खुले। यह इश्यू प्राइस ₹32 से करीब 11.5% की गिरावट को दर्शाता है। ग्रे मार्केट में मिली-जुली उम्मीदों के बावजूद, लिस्टिंग डे पर बिकवाली हावी रही और निवेशकों को लिस्टिंग गेन्स का कोई फायदा नहीं मिला।
IPO का गणित और चुनौतियां
कंपनी ने अपने IPO के जरिए कुल ₹420 करोड़ जुटाए थे, जिसमें ₹287 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹133 करोड़ का ऑफर फॉर सेल शामिल था। IPO को करीब 4.93 से 5.07 गुना सब्सक्राइब किया गया था, लेकिन लिस्टिंग के दिन निवेशकों का भरोसा डगमगाता दिखा।
कंपनी का बिजनेस और फाइनेंशियल हेल्थ
Acevector मुख्य रूप से Snapdeal, Unicommerce और Stellaro Brands के जरिए काम करती है। हालांकि कंपनी अपने घाटे को कम करने की कोशिश कर रही है, लेकिन मुनाफा अभी भी दूर है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी ने ₹45.51 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया, जो कि पिछले साल के ₹126.31 करोड़ के घाटे से तो बेहतर है, लेकिन मार्केट अब कंपनी के 'प्रॉफिटेबिलिटी पाथ' पर नजर गड़ाए हुए है।
कॉम्पिटिशन का दबाव
ई-कॉमर्स सेक्टर में Flipkart और Amazon जैसे दिग्गजों के बीच Acevector के लिए अपनी जगह बनाना चुनौतीपूर्ण है। टियर-2 शहरों पर फोकस करने वाली इस कंपनी को न केवल तगड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि लगातार बढ़ते ऑपरेशनल खर्चों को नियंत्रित करना भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। अब निवेशकों की निगाहें आने वाले तिमाही नतीजों पर टिकी हैं कि कंपनी लागत में कितनी कमी ला पाती है।
