नोएडा की EPC कंपनी Absolute Projects को SEBI से IPO लाने की मंजूरी मिल गई है। कंपनी **2 करोड़** इक्विटी शेयर्स जारी करेगी। इस फंड का इस्तेमाल **₹49.1 करोड़** का कर्ज चुकाने और **₹40.65 करोड़** नई मशीनरी खरीदने में किया जाएगा।
SEBI से मिली IPO की मंजूरी
नोएडा स्थित इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कंपनी Absolute Projects (India) को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से अपने आगामी इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए अंतिम मंजूरी मिल गई है। इस हरी झंडी के बाद, कंपनी अब पब्लिक मार्केट से फंड जुटाने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। इस इश्यू में पूरी तरह से 2 करोड़ नए इक्विटी शेयर्स फ्रेश इश्यू के तौर पर जारी किए जाएंगे, जिसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से कोई ऑफर-फॉर-सेल (OFS) शामिल नहीं होगा।
IPO के पैसों का कैसा होगा इस्तेमाल?
कंपनी ने जुटाए जाने वाले फंड के इस्तेमाल की एक स्पष्ट योजना बनाई है। IPO से मिलने वाली रकम का एक बड़ा हिस्सा मौजूदा कर्ज को चुकाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, जिसके लिए ₹49.1 करोड़ का आवंटन किया गया है। इससे कंपनी पर ब्याज का बोझ कम होगा और उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। कर्ज चुकाने के अलावा, कंपनी अपनी पूंजीगत विस्तार (capital expansion) के लिए ₹40.65 करोड़ खर्च करने की योजना बना रही है। इसमें दो विनिर्माण इकाइयों (manufacturing facilities) के लिए नए प्लांट और मशीनरी के साथ-साथ पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन प्रोजेक्ट्स के लिए विशेष उपकरण खरीदना शामिल है। इतना ही नहीं, ₹40 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी रखे जाएंगे, ताकि मौजूदा और भविष्य की परियोजनाओं का सुचारू रूप से निष्पादन हो सके।
बिजनेस का संदर्भ और सेक्टर
साल 1995 में स्थापित, Absolute Projects इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में काम करती है, खासकर पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन पर इसका फोकस है। यह कंपनी प्योर-प्ले कंस्ट्रक्शन फर्मों से थोड़ी अलग है क्योंकि इसके पास अपनी विनिर्माण सुविधाएं भी हैं, जहाँ यह अपनी परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण इलेक्ट्रिकल और स्ट्रक्चरल कंपोनेंट्स बनाती है। यह एकीकरण (integration) कंपनी को अपनी सप्लाई चेन पर कुछ हद तक नियंत्रण रखने की सुविधा देता है।
EPC सेक्टर अक्सर हाई कम्पटीशन और प्रोजेक्ट में देरी या लागत बढ़ने के जोखिमों के लिए जाना जाता है, जिसका असर मुनाफे पर पड़ सकता है। हालांकि, IPO से मिलने वाला पैसा कंपनी की बैलेंस शीट को मजबूत करेगा और ऑपरेशंस में मदद करेगा, लेकिन कंपनी का प्रदर्शन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की गति और सरकारी व निजी अनुबंधों को कुशलतापूर्वक हासिल करने और निष्पादित करने की उसकी क्षमता पर निर्भर करेगा। इस इश्यू के लिए क्युमुलेटिव कैपिटल (Cumulative Capital) को एकमात्र बुक-रनिंग लीड मैनेजर नियुक्त किया गया है।
निवेशकों को कंपनी की ऑर्डर बुक की स्थिति, बढ़ती इनपुट लागत के बावजूद लाभ मार्जिन बनाए रखने की क्षमता और नए उपकरणों से परिचालन दक्षता में सुधार पर नजर रखनी चाहिए। रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (Red Herring Prospectus) जैसे भविष्य के फाइलिंग में कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य, ऑर्डर निष्पादन के ट्रैक रिकॉर्ड और क्लाइंट बेस व प्रोजेक्ट पोर्टफोलियो से जुड़े विशिष्ट जोखिमों का विवरण मिलेगा।
