A-One Steels India का IPO अपने अंतिम दिन कुल **3 गुना** सब्सक्राइब होकर बंद हुआ है। रिटेल और नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की जोरदार भागीदारी के बीच, कंपनी अब जुटने वाली रकम में से **₹250 करोड़** का इस्तेमाल अपना कर्ज कम करने के लिए करेगी, जिस पर निवेशकों की खास नजर है।
बाजार की कैसी रही हलचल?
28 सितंबर, 2026 को बंद हुए इस ₹405 करोड़ के IPO में निवेशकों का उत्साह साफ दिखा। एक्सचेंज डेटा के अनुसार, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) का हिस्सा 5.62 गुना भरा, जबकि रिटेल निवेशकों ने 3.44 गुना आवेदन किए। स्टील सेक्टर की इस कंपनी के प्रति यह भरोसा दिखा रहा है कि निवेशक इसके भविष्य के विस्तार को लेकर उत्साहित हैं, हालांकि बाजार की स्थितियों पर लिस्टिंग का प्रदर्शन निर्भर करेगा।
कर्ज कम करने की रणनीति
कंपनी के IPO का मुख्य फोकस अपना बैलेंस शीट मजबूत करना है। जुटाई गई राशि में से ₹250 करोड़ का उपयोग कर्ज चुकाने के लिए किया जाएगा। स्टील मैन्युफैक्चरिंग जैसे कैपिटल-इंटेंसिव बिजनेस में कर्ज का बोझ कम होना नेट प्रॉफिट मार्जिन सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। बाकी बची राशि का इस्तेमाल कर्नाटक और आंध्र प्रदेश स्थित 6 मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज के सामान्य कामकाज के लिए किया जाएगा।
संस्थागत निवेशकों का भरोसा
पब्लिक इश्यू खुलने से पहले ही 23 सितंबर को कंपनी ने एंकर निवेशकों से ₹120.9 करोड़ जुटा लिए थे। इसमें Morgan Stanley, LRSD Securities और Longthrive Capital जैसे बड़े नाम शामिल रहे, जिन्होंने ₹385 से ₹405 प्रति शेयर के प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर दांव लगाया। कंपनी सालाना 17,33,100 मीट्रिक टन की क्षमता के साथ MS बिलेट्स और TMT बार्स बनाती है।
ग्रे मार्केट और रिस्क
फिलहाल ग्रे मार्केट में शेयर 14% के प्रीमियम पर चल रहा है, जो लिस्टिंग के दिन अच्छे मुनाफे के संकेत देता है। हालांकि, निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि ग्रे मार्केट की हलचल केवल अटकलें होती हैं और असल बाजार में उतार-चढ़ाव प्रीमियम को तेजी से बदल सकते हैं। स्टील सेक्टर की साइक्लिकल प्रकृति को देखते हुए, ग्लोबल कमोडिटी कीमतों पर नजर रखना भी जरूरी होगा।
