शेयर बाजार में प्राइमरी मार्केट की हलचल तेज हो गई है। 22 से 28 सितंबर के बीच 6 कंपनियां अपना IPO लेकर आ रही हैं, जिनका कुल लक्ष्य ₹3,825 करोड़ जुटाना है। निवेशकों को सलाह है कि वे कंपनी के विस्तार और मौजूदा प्रमोटर्स की बिकवाली के बीच का अंतर जरूर समझें।
भारतीय प्राइमरी मार्केट इस समय काफी व्यस्त है और साल 2026 में अब तक 87 IPO बाजार में आ चुके हैं। अगले हफ्ते यानी 22 सितंबर से 28 सितंबर के बीच 6 नए IPO बाजार में दस्तक देने के लिए तैयार हैं, जिससे बाजार में लिक्विडिटी का मुकाबला और भी कड़ा होने वाला है।
प्रमुख IPO और फंड का इस्तेमाल
इस दौड़ में सबसे बड़ा नाम Hillhouse Investment समर्थित Elevate Campuses है, जो ₹2,100 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है। इसका IPO 23 सितंबर को खुलेगा, जिसके लिए प्राइस बैंड ₹343 से ₹362 तय किया गया है। अच्छी बात यह है कि यह पूरी तरह से फ्रेश इश्यू है, यानी जुटाया गया पैसा सीधे कंपनी के विस्तार और प्रोजेक्ट्स में लगेगा।
वहीं, Varmora Granito भी ₹708 करोड़ का IPO लेकर आ रही है। इसमें कंपनी के अलावा मौजूदा निवेशक जैसे Katsura Investments अपना हिस्सा बेचेंगे, जिसे 'Offer for Sale' (OFS) कहा जाता है। इसके अलावा, A-One Steels India (₹405 करोड़), ArMee Infotech (₹300 करोड़), Swastika Infra (₹161 करोड़), और Adroit Industries (₹151 करोड़) भी बाजार से पैसा जुटाने की तैयारी में हैं।
बाजार का पाइपलाइन और सावधानियां
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पाइपलाइन बहुत बड़ी है। वर्तमान में 167 कंपनियां SEBI से मंजूरी पा चुकी हैं, जो भविष्य में ₹3.06 लाख करोड़ जुटा सकती हैं। इसके अलावा 71 कंपनियां अभी भी रेगुलेटरी मंजूरी का इंतजार कर रही हैं।
बाजार में एक साथ इतने IPO आने से लिक्विडिटी पर दबाव पड़ सकता है और अगर डिमांड कम हुई तो लिस्टिंग पर इसका असर देखने को मिल सकता है। निवेश करने से पहले Red Herring Prospectus (RHP) को ध्यान से पढ़ें और यह जरूर देखें कि कंपनी कर्ज चुकाने के लिए पैसा जुटा रही है या बिजनेस को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए।
