मार्केट में आई नरमी, IPOs हुए पोस्टपोन
ज्वेलरी सेक्टर में IPOs का pipeline फिलहाल रुक गया है। जिन पांच कंपनियों को कुल ₹3,840 करोड़ जुटाने थे, उन्होंने अपना IPO फिलहाल के लिए टाल दिया है। इसकी मुख्य वजह ज्वेलरी इंडस्ट्री की कमजोरी नहीं, बल्कि प्राइमरी मार्केट की सुस्त चाल और वैल्यूएशन को लेकर प्रमोटर्स (Promoters) व इन्वेस्टर्स (Investors) के बीच बड़ा अंतर है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लिस्टेड ज्वेलरी कंपनियों के मजबूत परफॉर्मेंस और नए IPOs पर निवेशक के बीच एक बड़ा गैप दिख रहा है।
इसमें Lalithaa Jewellery Mart का ₹1,700 करोड़, Augmont Enterprises का ₹800 करोड़, Priority Jewels का ₹540 करोड़ और Shankesh Jewellers व Sunil Gold (दोनों ₹400 करोड़ के) इश्यूज़ शामिल हैं। इन सभी कंपनियों के पास SEBI से IPO की मंजूरी थी, लेकिन अब वे बाजार में उतरने से कतरा रही हैं। Choice Capital के CEO, Ratiraj Tibrewal के मुताबिक, ये पोस्टपोनमेंट बाजार में बड़े बदलाव का संकेत है।
लिस्टेड कंपनियों का दबदबा, पर IPOs की मुश्किल
प्राइमरी मार्केट की सुस्ती के बावजूद, संगठित ज्वेलरी सेक्टर की सेहत काफी मजबूत दिख रही है। Titan Company, जिसका मार्केट कैप लगभग ₹3.94 लाख करोड़ है और P/E रेश्यो 82.65 है, शानदार नतीजे पेश कर रही है। Kalyan Jewellers India, जिसका वैल्यूएशन ₹45,611 करोड़ है और P/E 40.4 है, को एनालिस्ट्स से 'Strong Buy' रेटिंग मिली है, जो मौजूदा ₹441.65 के भाव से 44.14% की तेजी का अनुमान लगा रहे हैं। Senco Gold, जिसका वैल्यूएशन ₹5,298 करोड़ है और P/E 11.04 है, भी ₹323.3 के आसपास स्थिर प्रदर्शन कर रहा है। P.N. Gadgil Jewellers ने Q4 FY26 में 124% का रेवेन्यू ग्रोथ दिखाते हुए ₹3,552 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया (पूरे साल के लिए ₹10,744 करोड़)। यह स्टॉक ₹643.7 के भाव पर P/E 22.91 के साथ ट्रेड कर रहा है। इन मजबूत नतीजों के बावजूद नए IPOs को लेकर निवेशक सतर्क हैं।
वैल्यूएशन गैप और निवेशकों की सख्ती
इन ज्वेलरी IPOs के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा प्रमोटर्स की उम्मीदों और निवेशकों की भुगतान क्षमता के बीच लगातार बना हुआ अंतर है। यह तब और भी गंभीर हो जाता है जब हालिया IPOs लिस्टिंग के बाद मिले-जुले प्रदर्शन को दर्शाते हैं। पिछले कुछ सालों में, कई Offer-for-Sale (OFS) के ज़रिए प्रमोटर्स और प्राइवेट इक्विटी फर्मों ने ऊंचे दामों पर शेयर बेचकर सीधा फायदा उठाया, जिससे बिज़नेस ग्रोथ की जगह पैसे बेचने वालों की जेब में गए। नतीजतन, कई कंपनियां अब अपने IPO प्राइस से नीचे ट्रेड कर रही हैं, और उनके मार्केट कैप में पीक लेवल से औसतन ₹1,400 करोड़ की गिरावट आई है। ऐसे में इन्वेस्टर्स अब मुनाफे (Profit), कैश फ्लो (Cash Flow) और कंपनी मैनेजमेंट पर ज़्यादा बारीकी से नज़र रख रहे हैं।
लॉन्ग-टर्म आउटलुक अभी भी पॉजिटिव
वर्तमान रुकावटों के बावजूद, भारत के संगठित ज्वेलरी सेक्टर का लॉन्ग-टर्म ग्रोथ आउटलुक मजबूत बना हुआ है। अनुमान है कि FY30 तक यह सेक्टर 8-9% की सालाना दर से बढ़ेगा, और संगठित बाजार की हिस्सेदारी 40% को पार कर जाएगी। Titan, Kalyan, Senco और P.N. Gadgil Jewellers जैसी लिस्टेड कंपनियों का मजबूत प्रदर्शन और लचीलापन, उपभोक्ता मांग और इंडस्ट्री में बढ़ते औपचारिकता का संकेत देता है। जो IPOs टले हैं, उन्हें आगे बढ़ने के लिए कंपनियों को अपने वैल्यूएशन की उम्मीदों में बदलाव लाना होगा। इन्वेस्टर्स को स्पष्ट मुनाफे के अनुमान और मजबूत कॉर्पोरेट गवर्नेंस की ज़रूरत होगी। SEBI द्वारा IPO अप्रूवल की अवधि बढ़ाना एक व्यावहारिक कदम है, जिससे कंपनियां खराब शर्तों पर लिस्टिंग करने के बजाय बेहतर बाजार स्थितियों का इंतज़ार कर सकेंगी।