साल 2026 में प्राइमरी मार्केट में जबरदस्त हलचल रही है। अब तक 53 कंपनियों ने **₹67,322 करोड़** जुटाए हैं, जिनमें से 40 स्टॉक अपने इश्यू प्राइस से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। हालांकि, Omnitech Engineering, SEDEMAC Mechatronics और Shadowfax Technologies जैसे शेयरों ने जहां निवेशकों का पैसा दोगुना कर दिया है, वहीं टेक्सटाइल और एनालिटिक्स सेक्टर के शेयरों में भारी गिरावट देखी जा रही है।
भारतीय प्राइमरी मार्केट में साल 2026 काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। अब तक कुल 53 कंपनियों ने बाजार से ₹67,322.60 करोड़ जुटाए हैं। 25 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार, 40 नई लिस्टेड कंपनियां अपने इश्यू प्राइस से ऊपर कारोबार कर रही हैं। यह डेटा बताता है कि निवेशक अब केवल हवा में नहीं, बल्कि उन कंपनियों पर दांव लगा रहे हैं जिनका ट्रैक रिकॉर्ड और सेक्टर ग्रोथ मजबूत है।
मल्टीबैगर बने ये स्टॉक्स
इस साल तीन कंपनियों ने कमाल दिखाया है, जिन्होंने निवेशकों को 100% से ज्यादा का रिटर्न (ट्रिपल-डिजिट रिटर्न) दिया है: Omnitech Engineering, SEDEMAC Mechatronics और Shadowfax Technologies। इन कंपनियों ने अपने कमजोर डेब्यू के बाद शानदार वापसी की है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इनकी सफलता के पीछे इलेक्ट्रिक व्हीकल टेक्नोलॉजी, एनर्जी कंपोनेंट्स और टेक-ड्रिवेन लॉजिस्टिक्स में इनका फोकस है।
लार्ज-कैप और अन्य का हाल
बड़ी कंपनियों की बात करें तो प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। Manipal Health Enterprises अपने ₹590 के इश्यू प्राइस से 30% ऊपर ट्रेड कर रहा है। दूसरी ओर, SBI Funds Management अपने ₹574 के इश्यू प्राइस से करीब 5% नीचे चल रहा है, हालांकि भविष्य के लिहाज से इसमें अभी भी उम्मीदें कायम हैं। वहीं, Indo-MIM में 83% और Dhoot Transmission में 74% की जोरदार तेजी देखी गई है।
टेक्सटाइल सेक्टर में मंदी
इस साल टेक्सटाइल सेक्टर के लिए चीजें बहुत खराब रहीं। Shree Ram Twitex के शेयर में 64% की बड़ी गिरावट आई है। इसके अलावा, Innovision Ltd, Alpine Texworld और Aastha Spintex में 46% से 50% के बीच का नुकसान देखा गया है। डेटा एनालिटिक्स और इंडस्ट्रियल पार्क कंपनियों जैसे Horizon Industrial Parks और Fractal Analytics में भी क्रमशः 8% और 7.5% की गिरावट दर्ज की गई है।
निवेशकों के लिए सबक साफ है कि बाजार अब केवल सेंटीमेंट पर नहीं, बल्कि कंपनी की परफॉर्मेंस और एग्जीक्यूशन पर चल रहा है। जो 13 कंपनियां इश्यू प्राइस से नीचे कारोबार कर रही हैं, वे नए निवेशकों के लिए नई लिस्टिंग के जोखिम को समझने का एक बड़ा उदाहरण हैं।
