भारत में रहने वाले निवेशकों को एक बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यदि आपने विदेश में शेयर, प्रॉपर्टी या बैंक अकाउंट में पैसा निवेश किया है, तो आपकी भारतीय वसीयतनामा (Will) इन संपत्तियों को कवर करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती है। इसके चलते आपके प्रियजनों को संपत्ति हस्तांतरण में कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है।
विदेश में संपत्ति और भारतीय वसीयतनामा: क्या है पेंच?
कई भारतीय निवेशकों ने विदेश में शेयर बाजार, रियल एस्टेट या विदेशी बैंकों में बड़ी रकम निवेश की है। लेकिन, वे इस बात से अनजान हैं कि उनकी भारतीय वसीयतनामा (Will) इन विदेशी संपत्तियों को सीधे तौर पर कवर नहीं कर पाएगी। यह एक बड़ी कानूनी और प्रशासनिक समस्या खड़ी कर सकता है, खासकर जब संपत्ति का हस्तांतरण (transfer) का समय आता है।
प्रोबेट (Probate) कानूनों की पेचीदगियां
जब किसी व्यक्ति का निधन हो जाता है, तो उसकी संपत्ति का वितरण कानूनी प्रक्रिया से गुजरता है, जिसे प्रोबेट (Probate) कहते हैं। इसमें कोर्ट वसीयत को मान्य करता है और संपत्ति के वितरण की निगरानी करता है। समस्या यह है कि भारत के बाहर, हर देश के अपने अलग इनहेरिटेंस (inheritance) और प्रोबेट कानून होते हैं। आपकी भारतीय वसीयतनामा को सीधे तौर पर वहां की वित्तीय संस्थाएं, टैक्स अथॉरिटीज या प्रॉपर्टी रजिस्ट्री नहीं मानेंगी। अक्सर, जिस देश में संपत्ति है, वहां स्थानीय स्तर पर वसीयत को प्रमाणित (validate) कराना पड़ता है। इसमें लंबा समय, जटिल कागजी कार्रवाई और उत्तराधिकारियों (beneficiaries) के लिए भारी-भरकम कानूनी फीस लग सकती है।
अलग-अलग वसीयतनामे बनाने का जोखिम
विदेशों में संपत्ति के हस्तांतरण को आसान बनाने के लिए, कुछ वित्तीय और कानूनी सलाहकार यह सलाह देते हैं कि भारत के लिए एक अलग वसीयतनामा और हर उस देश के लिए अलग वसीयतनामा बनाया जाए जहां आपकी संपत्ति है। यह तरीका अमेरिका (US) या यूके (UK) जैसे देशों में प्रक्रिया को सुचारू बनाने में मदद कर सकता है। लेकिन, इसमें भी एक बड़ा जोखिम है। यदि इन वसीयतनामे को सावधानी से नहीं बनाया गया, तो वे एक-दूसरे के विपरीत हो सकते हैं। इससे कानूनी विवाद बढ़ सकते हैं या कोर्ट किसी एक वसीयत को अमान्य कर सकता है। इसलिए, यह सुनिश्चित करना बहुत ज़रूरी है कि प्रत्येक वसीयतनामा स्पष्ट रूप से बताए कि वह किन संपत्तियों को कवर करती है।
कर (Tax) और लागत का बोझ
कानूनी प्रक्रिया के अलावा, उत्तराधिकारियों पर आर्थिक बोझ भी काफी बढ़ सकता है। अलग-अलग देशों में इनहेरिटेंस टैक्स (inheritance tax) और एस्टेट ड्यूटी (estate duty) के कानून अलग-अलग होते हैं। प्रोबेट की लागत, जिसमें कोर्ट फीस और वकीलों की फीस शामिल है, भारत की तुलना में काफी ज्यादा हो सकती है। सही तालमेल के बिना, उत्तराधिकारियों को अप्रत्याशित रूप से उच्च टैक्स देनदारियों का सामना करना पड़ सकता है या उन्हें विदेशी संपत्ति बेचने या पैसा निकालने से पहले अतिरिक्त अदालती मंजूरी लेनी पड़ सकती है। निवेशकों को नियमित रूप से इन अंतरराष्ट्रीय पहलुओं की समीक्षा करनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनके परिवार की संपत्ति सुरक्षित है और संपत्ति का हस्तांतरण सुचारू रूप से हो सके।
