WTO में ई-कॉमर्स पर डेडलॉक (Deadlock)
विश्व व्यापार संगठन (WTO) में रविवार को ई-कॉमर्स पर इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन के लिए कस्टम ड्यूटी पर मोरेटोरियम (Moratorium) बढ़ाने को लेकर हुई बातचीत किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंची। कैमरून में मौजूद राजनयिकों ने बताया कि अमेरिका और भारत के बीच इस मुद्दे पर एक बड़ी खाई बनी हुई है, जो वैश्विक डिजिटल व्यापार की नीति को अनिश्चितता में डाल रही है।
अमेरिका बनाम भारत: उद्देश्यों का टकराव
यह गतिरोध मोरेटोरियम की समय-सीमा को लेकर दोनों देशों की अलग-अलग मांगों के कारण पैदा हुआ है, जो इस महीने समाप्त हो रहा है। अमेरिका स्थायी विस्तार चाहता है ताकि डिजिटल अर्थव्यवस्था में एक निश्चितता बनी रहे, और उसने कहा है कि वह अस्थायी नवीनीकरण में दिलचस्पी नहीं रखता। वहीं, भारत और कुछ अन्य WTO सदस्य दो साल के नवीनीकरण का समर्थन कर रहे हैं। व्यापार जगत के नेताओं ने विस्तार की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया है और चेतावनी दी है कि ड्यूटी लगने से वैश्विक वाणिज्य में बाधा आ सकती है।
WTO सुधार का व्यापक संदर्भ
समझौते के लिए प्रस्तावों में 10 साल के विस्तार के साथ एक स्थायी समाधान का मार्ग भी शामिल है, हालांकि कुछ राजनयिक पांच से 10 साल की अवधि पर विचार कर रहे हैं। दो साल से अधिक की अवधि पर सहमति कई देशों के लिए असंभव लग रही है। एक संशोधित मसौदा दस्तावेज में विकासशील देशों के लिए समर्थन को संबोधित करने और एक समीक्षा खंड (Review Clause) को शामिल करने की बात कही गई है। WTO में अमेरिकी राजदूत, जोसेफ बरलून (Joseph Barloon), ने कहा कि एक स्थायी विस्तार अमेरिका के विश्वास और व्यापार निकाय के साथ जुड़ाव के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने चेतावनी दी कि मोरेटोरियम को बढ़ाने में विफलता अमेरिकी भागीदारी में कमी को सही ठहरा सकती है। यह विवाद सब्सिडी पारदर्शिता, निर्णय लेने की प्रक्रिया और 'सबसे Favored-Nation' सिद्धांत पर WTO नियमों में सुधार के व्यापक प्रयासों के बीच हो रहा है। प्रक्रियात्मक देरी से महत्वपूर्ण सुधारों में बाधा आने पर निराशा बढ़ रही है।