पश्चिम बंगाल के स्पेशल टास्क फ़ोर्स (STF) ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के घर की जासूसी करने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा एक संदिग्ध भी शामिल है। इस मामले की जांच अभी जारी है और ऐसा माना जा रहा है कि पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स ने मुख्यमंत्री की सुरक्षा और गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए यह सब प्लान किया था।
बड़ा आतंकी मॉड्यूल हुआ बेनकाब
पश्चिम बंगाल के स्पेशल टास्क फ़ोर्स (STF) ने एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। STF ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की गतिविधियों और उनके निवास पर नज़र रखने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपी, हमीम मंडल को पिछले हफ्ते पुरबा बर्धमान से पकड़ा गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह गिरोह पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के इशारे पर काम कर रहा था। इनका मकसद मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक कार्यक्रमों की जानकारी जुटाना था।
डिजिटल सबूतों ने खोला राज
यह गिरफ्तारी मोबाइल टावर लोकेशन डेटा और अन्य डिजिटल सबूतों की गहन जांच के बाद हुई। इन सबूतों से मंडल का सीएम के चिनार पार्क स्थित घर और विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों में मौजूदगी का पता चला। शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने इन गतिविधियों से इनकार किया, लेकिन STF अधिकारियों ने तकनीकी सबूतों के आधार पर उनकी मौजूदगी की पुष्टि की है। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने सीएम के घर के पास किराए पर प्रॉपर्टी लेकर अपनी जासूसी गतिविधियों को और प्रभावी बनाने की योजना बनाई थी।
बड़ा षडयंत्र या सिर्फ जासूसी?
इस मामले में अर्पिता सरकार और आदित्य सिंह नाम के दो अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है। STF इन दोनों से भी पूछताछ कर रही है और इन पर बड़े षड्यंत्र का हिस्सा होने का भी शक है। आरोप है कि ये लोग प्रभावशाली राजनेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों से संबंध बनाकर गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे थे। अधिकारी इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और पाकिस्तान स्थित संदिग्धों द्वारा चलाए जा रहे बड़े सिंडिकेट से उनके संबंधों का पता लगाने के लिए वित्तीय लेनदेन, डिजिटल संचार और अन्य रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं।
सुरक्षा बढ़ाई गई, जांच जारी
इस घटना के बाद मुख्यमंत्री की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। STF राष्ट्रीय जांच एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि राज्य में मौजूद अन्य स्लीपर सेल या स्थानीय मददगारों का पता लगाया जा सके। यह जांच अभी संवेदनशील और सक्रिय चरण में है। अधिकारी CCTV फुटेज और कम्युनिकेशन डेटा की जांच कर रहे हैं ताकि इस जासूसी अभियान के पीछे की पूरी कहानी सामने आ सके। अगला कदम डिजिटल सबूतों का विश्लेषण करना होगा ताकि इस निगरानी अभियान के पीछे की पूरी कमांड चेन का पता लगाया जा सके।
