Vietnam और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव गहरा गया है। नवंबर में आने वाले अमेरिकी जांच के नतीजों से पहले वियतनाम पर नए टैरिफ का खतरा मंडरा रहा है, जो 'China+1' रणनीति और भारत की मैन्युफैक्चरिंग संभावनाओं के लिए अहम संकेत हो सकता है।
वियतनाम के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर Nguyen Van Thang इस हफ्ते वाशिंगटन में हैं, जहां वे अमेरिकी प्रशासन के साथ ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर नए सिरे से बातचीत कर रहे हैं। इस दौरे का मुख्य मकसद नवंबर 2026 में आने वाले जांच के नतीजों से पहले अमेरिकी चिंताओं को दूर करना है। फिलहाल, वियतनाम में अपने बेस बनाने वाली मल्टीनेशनल कंपनियों के बीच भारी अनिश्चितता बनी हुई है।
क्यों निशाने पर है वियतनाम?
विवाद की मुख्य जड़ 'ट्रांसशिपमेंट' (Transshipment) है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि चीन में बना सामान वियतनाम के रास्ते भेजा जा रहा है ताकि अमेरिकी टैरिफ से बचा जा सके। इसी कारण साल 2026 की पहली छमाही में वियतनाम का अमेरिका के साथ व्यापार सरप्लस $114 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो वाशिंगटन की कड़ी नजर में है।
क्या भारत के लिए बनेगा अवसर?
ग्लोबल निवेशक अक्सर वियतनाम और भारत को 'चीन के विकल्प' के रूप में देखते हैं। यदि नवंबर में अमेरिकी जांच के बाद वियतनाम पर कड़े टैरिफ लगाए जाते हैं, तो कंपनियों के लिए वियतनाम का आकर्षण कम हो सकता है। ऐसे में भारत के पास दो तरफा मौके हैं: या तो ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भारत का दबदबा बढ़ेगा, या फिर उभरते बाजारों में अस्थिरता का असर भारत के निर्यात पर भी देखने को मिल सकता है। निवेशकों की नजर अब नवंबर की उस रिपोर्ट पर है जो तय करेगी कि क्या वियतनाम अपनी साख बचा पाएगा या सप्लाई चेन का नया दौर शुरू होगा।
