अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) ने H-1B वीज़ा पिटीशन के लिए $100,000 (लगभग ₹83 लाख) की भारी-भरकम फीस को अस्थायी रूप से रोक दिया है। यह फैसला अमेरिका के फर्स्ट सर्किट कोर्ट के एक अहम फैसले के बाद आया है, जिससे पिटीशन फाइलिंग की लागत वापस $2,000 से $5,000 की सामान्य सीमा में आ गई है।
क्यों रोकी गई ₹100,000 की फीस?
USCIS ने एक आधिकारिक बयान में कहा है कि वे $100,000 की H-1B वीज़ा पिटीशन फीस लेना बंद कर रहे हैं। यह कदम 28 जुलाई को आए फर्स्ट सर्किट कोर्ट के उस फैसले के जवाब में उठाया गया है, जिसने डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के एक पुराने फैसले को बरकरार रखा था। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने इस फीस की वैधता पर सवाल उठाया था।
भारतीय IT कंपनियों को बड़ी राहत
यह खबर भारतीय IT कंपनियों के लिए बेहद अहम है, क्योंकि वे अमेरिका में प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए अक्सर H-1B वीज़ा पर निर्भर रहती हैं। $100,000 की नई फीस इन कंपनियों पर भारी वित्तीय बोझ डालने वाली थी। अब जब फीस वापस $2,000 से $5,000 की सामान्य रेंज में आ गई है, तो कंपनियों को थोड़ी राहत मिली है। इससे उन्हें स्टाफिंग और प्रोजेक्ट कॉस्ट मैनेजमेंट में अधिक फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी, जो कि निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ था।
कानूनी पेंच और भविष्य की अनिश्चितता
इस कानूनी लड़ाई का मुख्य बिंदु यह है कि सरकार ने यह फीस किस प्रक्रिया से लागू की थी। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज लियो सोरोकिन ने पहले ही कहा था कि इस फीस, जो एक तरह का टैक्स थी, के लिए एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसीजर एक्ट के तहत एक औपचारिक सार्वजनिक नोटिस और कमेंट प्रोसेस की जरूरत थी, जिसका सरकार पालन करने में विफल रही। फर्स्ट सर्किट कोर्ट ने भी इसी फैसले को माना है।
हालांकि, डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने कहा है कि अगर यह कोर्ट का आदेश पलटता है तो वे अभी भी यह फीस वसूलने का इरादा रखते हैं। इसका मतलब है कि आज भले ही लागत कम हो गई हो, लेकिन स्थिति अभी भी अनिश्चित है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट से स्टे ऑर्डर की मांग कर सकती है, जिससे यह फीस भविष्य में फिर से लागू हो सकती है।
आगे क्या देखें?
पिछले एक साल में H-1B वीज़ा प्रोग्राम पर ज्यादा फोकस रहा है। USCIS के मई के आंकड़ों के अनुसार, 2027 के फाइनेंशियल ईयर के लिए H-1B रजिस्ट्रेशन में 38.5% की गिरावट आई थी, जो इमिग्रेशन पॉलिसी और टैलेंट मोबिलिटी में बदलाव का संकेत देता है। निवेशकों को इस फीस की कानूनी स्थिति पर नजर रखनी चाहिए और सरकार की ओर से इसे फिर से लागू करने के किसी भी प्रयास पर ध्यान देना चाहिए। भारतीय IT कंपनियों से भी उम्मीद है कि वे अपनी अगली तिमाही की कमाई कॉल में इस मामले पर अपनी राय देंगी।
