USCIS ने वर्क परमिट की **540-दिन** वाली ऑटोमैटिक एक्सटेंशन सुविधा को खत्म कर दिया है। इस फैसले का असर H-1B वीजा धारकों के जीवनसाथी (H-4) और कई विदेशी प्रोफेशनल्स पर पड़ेगा, जिससे भारतीय IT कंपनियों के लिए प्रशासनिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
अमेरिकी आव्रजन प्राधिकरण (USCIS) ने वर्क परमिट (EAD) के लिए दी जाने वाली 540-दिन की ऑटोमैटिक एक्सटेंशन सुविधा को बंद कर दिया है। मई 2022 में इसे भारी बैकलाग को संभालने के लिए एक सुरक्षा कवच के रूप में शुरू किया गया था, लेकिन अब इसे हटाए जाने से हजारों विदेशी कर्मचारियों के लिए अनिश्चितता पैदा हो गई है।
भारतीय IT सेक्टर के लिए चिंताएं
अमेरिका में कार्यरत भारतीय IT दिग्गज अपनी प्रतिभा के लिए काफी हद तक स्किल्ड प्रोफेशनल्स पर निर्भर हैं। इस सुविधा के बंद होने से प्रोजेक्ट डिलीवरी में देरी और कर्मचारियों के स्टेटस को लेकर कानूनी जटिलताएं बढ़ सकती हैं। कंपनियों को अब अपने कर्मचारियों के परमिट को लेकर पहले से कहीं ज्यादा सतर्क रहना होगा, जिससे प्रशासनिक और कानूनी खर्चों में इजाफा होना तय है।
नई पॉलिसी का झटका
अमेरिकी प्रशासन अब वीजा नवीनीकरण (Renewal) की प्रक्रिया को भी कठिन बनाने की तैयारी कर रहा है। नई प्रस्तावित नीतियों के तहत, अब पुराने वीजा अप्रूवल को आधार नहीं माना जाएगा, बल्कि हर एक्सटेंशन पिटीशन का 'फ्रेश रिव्यू' किया जाएगा। इसका मतलब है कि हर फाइलिंग के लिए पूरी तरह से नया डॉक्यूमेंटेशन जरूरी होगा, जो पहले की तुलना में काफी कठिन है।
RFE बढ़ने का खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सख्ती के चलते 'Request for Evidence' (RFE) के मामलों में भारी उछाल आएगा। पेपरवर्क बढ़ने से न केवल समय ज्यादा लगेगा, बल्कि कंपनियों के लिए टैलेंट मैनेजमेंट कॉस्ट भी बढ़ जाएगी। निवेशक अब आने वाली तिमाही नतीजों में मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजर रखेंगे, ताकि यह समझ सकें कि ये बदलाव कंपनी के मुनाफे और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को कितना प्रभावित करेंगे।
फिलहाल, डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी नवंबर के मध्य तक इस पर पब्लिक कमेंट्स ले रहा है, जिसके बाद ही फाइनल तस्वीर साफ हो पाएगी।
