राष्ट्रपति Donald Trump ने रूस से आने वाले कच्चे तेल और गैस पर से **100%** टैरिफ हटा दिया है। साथ ही, घरेलू कीमतों को स्थिर करने के लिए **1.8 मिलियन टन** डीजल के आयात का बड़ा फैसला लिया गया है, जिसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है।
बड़ा नीतिगत बदलाव
अमेरिका सरकार ने ऊर्जा व्यापार में एक बड़ा बदलाव करते हुए रूसी क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस पर लगाए गए 100% टैरिफ को खत्म कर दिया है। यह फैसला 'Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026' के तहत लिया गया है। इसके अलावा, मिड-टर्म चुनाव से पहले अमेरिकी बाजार में ईंधन की कमी न हो, इसके लिए 1.8 मिलियन टन डीजल आयात का भी करार किया गया है।
यूक्रेन की नाराजगी और कूटनीतिक तनाव
इस फैसले पर कीव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy का कहना है कि यह कदम रूस पर बना आर्थिक दबाव कम करेगा। हालांकि, इसके साथ ही अमेरिका और रूस के बीच संभावित शांति वार्ता की अटकलें भी तेज हो गई हैं, लेकिन White House या Kremlin की ओर से अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
भारत एक बड़ा क्रूड ऑयल आयातक देश है, इसलिए ग्लोबल मार्केट में होने वाली हलचल सीधे हमारे ट्रेड डेफिसिट और तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के मुनाफे पर असर डालती है। अगर पश्चिमी देशों में रूसी ईंधन की सप्लाई बढ़ती है, तो ग्लोबल सप्लाई चेन में लचीलापन आ सकता है, जिससे क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल पर लगाम लग सकती है। हालांकि, भू-राजनीतिक अस्थिरता और अन्य देशों की प्रतिक्रिया अभी भी एक बड़ा जोखिम बनी हुई है जिस पर निवेशकों को नजर रखनी होगी।
