US Visa Rule Change: भारतीय छात्रों पर 4 साल की नई सीमा का असर?

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AuthorNeha Patil|Published at:
US Visa Rule Change: भारतीय छात्रों पर 4 साल की नई सीमा का असर?

अमेरिकी सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' (Duration of Status) सिस्टम को खत्म करने की योजना बनाई है। नए नियम के तहत, F-1 वीज़ा पर अमेरिका आने वाले छात्रों को आमतौर पर केवल **4 साल** तक रहने की अनुमति होगी। ऐसे छात्र जिनके अकादमिक प्रोग्राम, जैसे लंबे रिसर्च या डॉक्टरेट डिग्री, इस अवधि से ज़्यादा के हैं, उन्हें अब औपचारिक एक्सटेंशन लेना होगा। अमेरिका में वर्तमान में **3.31 लाख** से ज़्यादा भारतीय छात्र हैं, और यह बदलाव उनके लिए नई कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियाँ खड़ी कर सकता है।

'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' सिस्टम का अंत?

अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (Department of Homeland Security) ने एक नया नियम तैयार किया है, जो अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए लंबे समय से चले आ रहे 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' (Duration of Status) सिस्टम से एक बड़ा बदलाव है। इस नए प्रस्ताव के तहत, F-1 वीज़ा पर छात्रों को आम तौर पर केवल 4 साल तक अमेरिका में रहने की अनुमति होगी। यह बदलाव छात्रों की ज़िम्मेदारी बढ़ाता है, क्योंकि अब जिन छात्रों के अकादमिक प्रोग्राम, जैसे कि विशेष डॉक्टरेट या रिसर्च-आधारित मास्टर डिग्री, 4 साल से ज़्यादा के हैं, उन्हें सरकार से सक्रिय रूप से एक्सटेंशन हासिल करना होगा।

उच्च शिक्षा कार्यक्रमों पर असर

कई दशकों से, अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को अमेरिका में तब तक रहने की इजाज़त थी जब तक वे फुल-टाइम स्टूडेंट बने रहते थे और वीज़ा की शर्तों का पालन करते थे। प्रस्तावित बदलाव इस स्वचालित दर्जे को प्रभावी ढंग से समाप्त कर देता है। यह नियम J-1 वीज़ा वाले एक्सचेंज विजिटर्स (Exchange Visitors) और कुछ I वीज़ा श्रेणियों पर भी लागू होगा, जिससे इन समूहों के लिए एक मानकीकृत, निश्चित समाप्ति अवधि तय होगी। प्रशासन का कहना है कि इसका मकसद निगरानी बढ़ाना है, लेकिन शैक्षणिक संस्थानों ने चिंता जताई है कि इससे छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण प्रशासनिक जटिलताएँ और अनिश्चितता पैदा होगी।

भारतीय छात्र समुदाय के लिए चुनौतियाँ

'ओपन डोर्स 2024' रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 अकादमिक वर्ष के दौरान अमेरिका में नामांकित अंतर्राष्ट्रीय विद्वानों में भारतीय छात्रों का समूह सबसे बड़ा है, जिनकी संख्या 3.31 लाख से अधिक है। इनमें से एक बड़ा हिस्सा STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) क्षेत्रों से जुड़ा है, जहाँ मास्टर और डॉक्टरेट प्रोग्राम अक्सर 4 साल से अधिक चलते हैं। इन छात्रों को, जो कई अमेरिकी विश्वविद्यालयों के रिसर्च आउटपुट के लिए महत्वपूर्ण हैं, अब अपनी कानूनी स्थिति बनाए रखने के लिए संघीय एक्सटेंशन आवेदन (Federal Extension Application) प्रक्रिया से गुज़रना होगा।

प्रशासनिक देरी का जोखिम

कानूनी विशेषज्ञों और शिक्षा अधिवक्ताओं द्वारा जताई गई मुख्य चिंताओं में से एक यह है कि छात्र अनजाने में 'अवैध उपस्थिति' (Unlawful Presence) के दायरे में आ सकते हैं। मौजूदा सिस्टम के तहत, फुल-टाइम एनरोलमेंट बनाए रखना स्टेटस समाप्त होने से सुरक्षा प्रदान करता था। नए नियमों के तहत, जोखिम अब प्रशासनिक प्रसंस्करण (Administrative Processing) के समय पर स्थानांतरित हो जाता है। एक्सटेंशन आवेदन प्रक्रिया में कोई भी देरी, क्लर्क की गलती या देरी छात्र को वैध वीज़ा स्टेटस के बिना छोड़ सकती है, भले ही उनकी अकादमिक स्थिति या अनुपालन कुछ भी हो।

यह नियम वर्तमान में एक अनिवार्य कांग्रेस समीक्षा अवधि (Congressional Review Period) में प्रवेश कर रहा है। मौजूदा 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' नियम इस प्रक्रिया के समाप्त होने और नए कार्यान्वयन समय-सारणी की आधिकारिक घोषणा तक प्रभावी रहेंगे। छात्र और हितधारक अब इस बात पर विशिष्ट मार्गदर्शन की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि सरकार एक्सटेंशन आवेदनों को कैसे संभालेगी और क्या रिसर्च-इंटेंसिव अकादमिक कार्यक्रमों के लिए सुव्यवस्थित प्रक्रियाएँ होंगी।

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