G20 समिट में US ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने 'Operation Economic Outcast' के तहत ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की तैयारी शुरू कर दी है। इसका सीधा असर ग्लोबल क्रूड ऑयल सप्लाई और भारतीय बाजार के सेंटीमेंट पर पड़ सकता है।
'Operation Economic Outcast' का क्या है एजेंडा?
अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने नॉर्थ कैरोलिना में हो रहे G20 फाइनेंस समिट के दौरान ईरान के बैंकिंग सेक्टर को निशाने पर लिया है। यह कदम मिलिट्री एक्शन के बजाय आर्थिक दबाव के जरिए ईरान के प्रभाव को सीमित करने की एक बड़ी रणनीतिक चाल है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्यों है चिंता की बात?
भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात (Import) से पूरा करता है। यदि ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगते हैं, तो 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) जैसे अहम रास्तों पर तनाव बढ़ सकता है। इससे तेल की कीमतों में भारी अस्थिरता आ सकती है, जो सीधे तौर पर भारत के इंपोर्ट बिल और घरेलू महंगाई (Inflation) को प्रभावित कर सकती है।
सेकेंडरी सैंक्शंस का खतरा
अमेरिका ने चेतावनी दी है कि जो भी देश ईरान के साथ तेल व्यापार को सुविधाजनक बनाएगा, उस पर 'सेकेंडरी सैंक्शंस' (Secondary Sanctions) लगाए जाएंगे। इसमें चीन जैसे बड़े व्यापारिक साझेदार भी शामिल हैं। अगर यह व्यापारिक तनाव बढ़ता है, तो ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित हो सकती है, जिससे उभरते बाजारों (Emerging Markets) में निवेश का सेंटीमेंट बिगड़ने का डर है।
अब आगे क्या देखें?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन प्रतिबंधों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका अन्य G20 देशों को एक साथ ला पाता है या नहीं। निवेशकों को फिलहाल क्रूड ऑयल प्राइसेज और प्रमुख देशों के आधिकारिक बयानों पर पैनी नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि सप्लाई में कोई भी कमी सीधे तौर पर मार्केट में वोलेटिलिटी (Volatility) पैदा कर सकती है।
