वाशिंगटन ने ब्रिटेन के यूरोपीय संघ (EU) के साथ रेगुलेटरी तालमेल पर गहरी नाराजगी जताई है। इस कूटनीतिक गतिरोध ने प्रधानमंत्री Andy Burnham की इकोनॉमिक रिकवरी रणनीति के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं, जिससे एग्रीकल्चर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे अहम सेक्टर पर बड़ा असर पड़ सकता है।
ट्रेड पॉलिसी पर छिड़ा विवाद
US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव Jamieson Greer ने ब्रिटेन की वर्तमान ट्रेड नीति की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि लंदन का यूरोपीय संघ (EU) के नियमों के साथ बने रहने का फैसला वाशिंगटन के साथ व्यापारिक रिश्तों को विस्तार देने में सबसे बड़ी बाधा बन रहा है। यह टकराव Brexit के बाद की ब्रिटिश आर्थिक रणनीति और अमेरिकी उम्मीदों के बीच की खाई को साफ दिखाता है।
क्यों नाराज है अमेरिका?
प्रधानमंत्री Andy Burnham के नेतृत्व में ब्रिटेन का झुकाव फिर से ब्रसेल्स की ओर बढ़ रहा है, जिसे वे अपनी आर्थिक रिकवरी का जरिया मान रहे हैं। हालांकि, वाशिंगटन का मानना है कि ब्रिटेन ने EU स्टैंडर्ड्स से अलग होने की अपनी आजादी का सही इस्तेमाल नहीं किया है। मई 2025 में दोनों देशों के बीच लग्जरी गाड़ियों और स्टील-एल्युमीनियम जैसे इंडस्ट्रियल मेटल्स पर टैरिफ कम करने के लिए एक सीमित ट्रेड फ्रेमवर्क तैयार किया गया था, लेकिन अब अमेरिका इससे कहीं ज्यादा की उम्मीद लगाए बैठा है।
निवेशकों के लिए जोखिम
अमेरिकी ट्रेड नेगोशिएटर्स अब एग्रीकल्चर सेक्टर, खास तौर पर US बीफ और इथेनॉल के लिए ब्रिटेन के बाजार में ज्यादा एक्सेस चाहते हैं। हालांकि, ब्रिटिश सरकार का दावा है कि वे फूड सेफ्टी नियमों के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे। इस बीच, निवेशकों की चिंताएं बढ़ रही हैं क्योंकि ट्रेड नीति में यह अनिश्चितता उन कंपनियों पर भारी पड़ सकती है जो ट्रांसअटलांटिक बिजनेस पर निर्भर हैं। यदि यह तनाव बढ़ता है और टैरिफ विवाद में तब्दील होता है, तो ब्रिटिश कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। बाजार की नजरें अब आने वाले UK-EU समिट्स और अमेरिकी ट्रेड ऑफिस के अगले कदमों पर टिकी हैं, जिसका सीधा असर ब्रिटिश पाउंड (GBP) और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर दिख सकता है।
