सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बड़ा असर
20 फरवरी, 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए बड़े टैरिफ को अमान्य कर दिया। इसके ठीक छह दिन बाद, 26 फरवरी, 2026 को नई दिल्ली में अमेरिकी कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुट्निक और भारतीय कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल के बीच एक अहम बातचीत हुई। सुप्रीम कोर्ट के इस बड़े फैसले ने एग्जीक्यूटिव ब्रांच (executive branch) से एकतरफा टैरिफ लगाने का सबसे बड़ा हथियार छीन लिया है, जिससे बातचीत के माहौल में भारी बदलाव आया है। अब भारत को पहले से बेहतर शर्तों पर डील (deal) करने का मौका मिल सकता है।
अमेरिका का नया दांव: अस्थायी ग्लोबल टैरिफ
हालांकि, अमेरिका ने तुरंत ही एक नया कदम उठाया। उन्होंने ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 के तहत अस्थायी ग्लोबल टैरिफ (global tariff) का ऐलान कर दिया, जिसे पहले 10% रखा गया और बाद में बढ़ाकर 15% कर दिया गया। इस अचानक हुई पॉलिसी (policy) में बदलाव ने द्विपक्षीय व्यापार (bilateral trade) में तुरंत ही एक बड़ी अनिश्चितता ला दी है।
डील पर भारत की नई रणनीति
फरवरी 2026 की शुरुआत में सामने आए अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट (interim trade agreement) फ्रेमवर्क का मकसद अमेरिकी टैरिफ को 50% से घटाकर भारतीय सामानों पर 18% करना था। इसके बदले भारत को पांच साल में अमेरिकी उत्पादों की $500 अरब की खरीद करनी थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले और अमेरिका के नए कदम के बाद, भारत ने इस डील को फाइनल (final) करने के लिए वाशिंगटन डी.सी. जाने वाले अपने ट्रेड डेलीगेशन (trade delegation) के दौरे को फिलहाल टाल दिया है। भारत अब 'ताजा घटनाक्रम और इसके असर का मूल्यांकन' करना चाहता है। यह रणनीतिक रोक भारत को अमेरिका की बदलती टैरिफ पॉलिसी को समझने और IEEPA-आधारित खतरों के बिना शर्तों पर फिर से बातचीत करने का मौका देगी।
डील में असंतुलन और भविष्य की चिंताएं
हालांकि, कुछ जोखिम अभी भी बने हुए हैं। सेक्शन 122 के तहत लगाए गए टैरिफ, भले ही अस्थायी हों, यह दिखाते हैं कि अमेरिका टैरिफ के जरिए दबाव बनाए रखना चाहता है। कई विश्लेषणों से यह भी पता चलता है कि प्रस्तावित इंडिया-यूएस डील में असंतुलन (asymmetry) है, जहां भारत इंडस्ट्रियल गुड्स (industrial goods) पर टैरिफ को शून्य करने जैसे बड़े रियायतें दे रहा है, जबकि उसे अभी भी 18% अमेरिकी टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है। एग्जीक्यूटिव ब्रांच की तरफ से टैरिफ लगाने के संवैधानिक पहलू पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने टैक्स लगाने में कांग्रेस की मुख्य भूमिका पर जोर दिया है।
आगे की राह
दोनों देश बातचीत जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं और माना जा रहा है कि दोनों देशों के नेगोशिएटर्स (negotiators) इस ताजा स्थिति का पूरा मूल्यांकन करने के बाद वाशिंगटन डी.सी. में फिर से मिलेंगे। फ्रेमवर्क एग्रीमेंट अभी भी बातचीत का आधार है, जिसे मार्च में फाइनल और अप्रैल 2026 तक लागू करने का लक्ष्य है। लेकिन भारत के इस रणनीतिक इंतजार से लगता है कि वह भविष्य की पॉलिसी में अस्थिरता से बचाव और एक स्पष्ट, आपसी फायदे वाले समझौते की तलाश में है।