अमेरिका के लेबर डिपार्टमेंट ने TCS, Infosys, Wipro और HCLTech समेत 8 प्रमुख टेक कंपनियों के लिए PERM सर्टिफिकेशन प्रोग्राम को सस्पेंड कर दिया है। इस फैसले से नई ग्रीन कार्ड प्रक्रिया रुक गई है, लेकिन भारतीय IT शेयरों में आज **3%** से ज्यादा की उछाल देखने को मिली।
क्या है PERM सस्पेंशन का असर?
अमेरिका के लेबर डिपार्टमेंट के इस कदम का मतलब है कि ये कंपनियां अब नई परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन फाइल नहीं कर पाएंगी, जो अमेरिकी ग्रीन कार्ड हासिल करने की पहली और सबसे जरूरी सीढ़ी है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि इससे मौजूदा H-1B वीजा पर कोई असर नहीं पड़ेगा और कंपनियों का कामकाज फिलहाल सुचारू रूप से चलता रहेगा। चिंता का मुख्य विषय केवल टैलेंट रिटेंशन और लंबी अवधि के लिए कुशल विदेशी कर्मचारियों को रोके रखना है, जिससे भविष्य में हायरिंग कॉस्ट बढ़ सकती है।
डिप्लोमैटिक टेंशन और बाजार का रिएक्शन
यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच वीजा को लेकर खींचतान बढ़ी है। हाल ही में अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance द्वारा H-1B वीजा धारकों को लेकर की गई टिप्पणी पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कड़ी आपत्ति जताई है।
बाजार की बात करें तो, 9 अक्टूबर 2026 को आई इस खबर के बावजूद Nifty IT इंडेक्स में 3% से अधिक की तेजी दर्ज की गई। एनालिस्ट्स का मानना है कि निवेशकों ने इस रेगुलेटरी रिस्क को पहले ही भांप लिया था और TCS जैसे दिग्गजों के शानदार क्वार्टरली नतीजों ने निवेशकों का भरोसा बनाए रखा है।
निवेशकों के लिए आगे का रास्ता
अमेरिकी प्रशासन ने इस कार्रवाई के पीछे प्रोग्राम के दुरुपयोग की जांच और घरेलू वर्कर्स को प्राथमिकता देने का तर्क दिया है। फिलहाल स्थिति अनिश्चित बनी हुई है, इसलिए निवेशकों को इन कंपनियों की ओर से आने वाली फाइलिंग और किसी भी कानूनी चुनौती पर नजर रखनी चाहिए। यदि यह पाबंदी लंबे समय तक चलती है या अन्य वीजा श्रेणियों तक फैलती है, तो यह IT सेक्टर के कॉस्ट स्ट्रक्चर पर दबाव डाल सकती है।
