US Supreme Court का बड़ा फैसला: भारत को मिलेंगे अरबों डॉलर, टैरिफ रिफंड का रास्ता खुला

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AuthorAditya Rao|Published at:
US Supreme Court का बड़ा फैसला: भारत को मिलेंगे अरबों डॉलर, टैरिफ रिफंड का रास्ता खुला
Overview

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (US Supreme Court) ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भारत और अमेरिका के बीच चल रहे 'रेसिप्रोकल टैरिफ' (reciprocal tariffs) को खत्म कर दिया है। इस फैसले का मतलब है कि भारतीय एक्सपोर्टर्स (exporters) को अब अरबों डॉलर का रिफंड (refund) मिलेगा और दोनों देशों के बीच ट्रेड (trade) की बातचीत फिर से शुरू होगी।

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अमेरिका का बड़ा फैसला, भारत को मिलेगा अरबों का रिफंड

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भारत-अमेरिका ट्रेड (trade) संबंधों में एक बड़ा मोड़ है। कोर्ट ने 'रेसिप्रोकल टैरिफ' को खारिज कर दिया है, जिसका सीधा असर अमेरिकी कस्टम्स (Customs) द्वारा वसूले गए $160 बिलियन से अधिक के ड्यूटी (duty) पर पड़ेगा। अब ये राशि रिफंड (refund) करनी होगी। खास बात यह है कि भारतीय एक्सपोर्टर्स (exporters) को इससे बड़ा फायदा होने वाला है, क्योंकि वे $12 बिलियन तक के रिफंड का दावा कर सकते हैं। जानकारी के मुताबिक, 300,000 से ज़्यादा ट्रेडर्स (traders) इस रिफंड के लिए आवेदन करेंगे, जिसके चलते आवेदन पोर्टल पर भारी भीड़ देखी गई।

'यूनिवर्सल टैरिफ' और भारत की सौदेबाजी की शक्ति

इस फैसले ने ट्रेड टॉक (trade talk) की तस्वीर बदल दी है। पहले भारत को बाकी देशों के मुकाबले थोड़ी अलग ट्रीटमेंट (treatment) मिलती थी, जिससे उसे थोड़ी बढ़त हासिल थी। लेकिन कोर्ट के इस फैसले के बाद अब 10% का 'यूनिवर्सल टैरिफ' (universal tariff) लागू होगा। पूर्व एम्बेसडर मीरा शंकर (Meera Shankar) के अनुसार, अगर भारत बिना किसी नए समझौते के इस स्टैंडर्ड रेट (standard rate) को मान लेता है, तो उसे काफी नुकसान हो सकता है।

अमेरिकी एक्सपोर्ट्स पर नए दबाव

पूर्व WTO एम्बेसडर जयंत दासगुप्ता (Jayant Dasgupta) ने बताया कि अमेरिका अब जबरन श्रम (forced labor) और अधिक उत्पादन क्षमता (excess manufacturing capacity) जैसे मुद्दों पर समानांतर जांच (parallel investigations) का इस्तेमाल कर रहा है। ये जांचें इंजीनियरिंग गुड्स (engineering goods), टेक्सटाइल्स (textiles) और लेदर (leather) जैसे सेक्टरों पर केंद्रित हैं और ट्रेड टॉक (trade talk) में अहम मुद्दे बन गए हैं। दासगुप्ता ने चेतावनी दी है कि यदि नई दिल्ली अमेरिकी-समर्थित डील्स (deals) पर हस्ताक्षर करने से इनकार करती है, तो भारत पर नए टैरिफ (tariffs) लगने की संभावना 'काफी ज़्यादा' है। उन्होंने यह भी बताया कि लगभग 16 देशों पर अतिरिक्त क्षमता के लिए और करीब 60 देशों पर जबरन श्रम के लिए जांच चल रही है, ताकि उन्हें नई ट्रेड एग्रीमेंट्स (trade agreements) पर मजबूर किया जा सके।

ट्रेड टॉक में भारत का रुख

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय नेगोशिएटर्स (negotiators) वाशिंगटन को बता रहे हैं कि अमेरिकी ट्रेड लॉ (trade law) के सेक्शन 301 (Section 301) के तहत कार्रवाई की कोई खास वजह नहीं है। एम्बेसडर शंकर का कहना है कि भारत की एक्सपोर्ट क्षमता (export capacity) अमेरिकी डोमेस्टिक प्रोडक्शन (domestic production) को कोई खतरा नहीं पहुंचाती। नई दिल्ली बातचीत में 'नई जमीन' तलाश रही है, जिसमें पारस्परिकता (reciprocity) और आपसी लाभ (mutual benefit) पर जोर दिया जा रहा है, जिसे कॉमर्स मिनिस्टर (Commerce Minister) पीयूष गोयल (Piyush Goyal) भी साझा करते हैं।

अन्य ट्रेड और एनर्जी चिंताएं

दासगुप्ता ने भारतीय फार्मास्यूटिकल्स (pharmaceuticals) पर अमेरिकी टैरिफ (tariffs) की चिंताओं को कमतर आंका। उनका कहना है कि जेनेरिक मार्केट (generics market) में सेक्टर की मजबूत पकड़ पेटेंटेड मेडिसिन (patented medicine) एक्सपोर्टर्स (exporters) के लिए ज्यादा सुरक्षा देती है। अलग से, एम्बेसडर शंकर ने भारत के रूसी ऑयल (Russian oil) इम्पोर्ट्स (imports) को लेकर अनिश्चितता पर प्रकाश डाला। पश्चिम एशिया संकट (West Asia crisis) के कारण मिले अस्थायी वेवर (waivers) से खरीदारी जारी रही, लेकिन भविष्य में इन्हें आगे बढ़ाने की स्थिति स्पष्ट नहीं है, जो भारत की एनर्जी सिक्योरिटी (energy security) को प्रभावित कर सकती है। टैरिफ रिफंड (tariff refunds) और कड़े टॉक्स (talks) का यह मेल एक जटिल ट्रेड (trade) की स्थिति बनाता है। भारत की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह इन बदलती ट्रेड पॉलिसीज (trade policies) को कैसे संभालता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.