US State Department ने अपने आधिकारिक दस्तावेजों से 'Artificial Intelligence' शब्द को हटाकर अब 'Super Intelligence' इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के UN संबोधन के बाद लिया गया यह फैसला अमेरिका की नई टेक-फ्रेंडली नीति और तेजी से बढ़ते तकनीकी प्रभुत्व की ओर इशारा करता है।
शब्द के पीछे का बड़ा खेल
US स्टेट डिपार्टमेंट के 'ब्यूरो ऑफ इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन अफेयर्स' ने स्टाफ को एक नया निर्देश जारी किया है। इसके तहत अब आधिकारिक पत्रों और प्रेस रिलीज में 'Artificial Intelligence' (AI) की जगह 'Super Intelligence' शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा संयुक्त राष्ट्र में दिए गए उस भाषण के बाद आया है, जिसमें उन्होंने 'Artificial' शब्द को नकारात्मक और भ्रामक करार दिया था।
इनोवेशन पर फोकस की रणनीति
यह बदलाव सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमेरिका की बदलती रणनीति को दिखाता है। चीन के साथ बढ़ती तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच, अमेरिका अपनी मशीन लर्निंग और ऑटोनॉमस सिस्टम्स को अब 'Super Intelligence' के रूप में पेश कर रहा है। प्रशासन का लक्ष्य कम रेगुलेटरी बाधाओं के साथ तकनीक के विकास को रफ्तार देना है ताकि अमेरिका ग्लोबल टेक रेस में सबसे आगे रहे।
भारतीय IT सेक्टर पर असर
भारतीय निवेशकों के लिए यह खबर काफी अहम है, क्योंकि भारत की बड़ी IT कंपनियों का अधिकांश रेवेन्यू अमेरिकी क्लाइंट्स से आता है। यदि अमेरिका में रेगुलेशन आसान होते हैं और इनोवेशन पर जोर बढ़ता है, तो भारतीय कंपनियों के लिए डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स की डिमांड बढ़ सकती है। हालांकि, जोखिम यह है कि अगर अमेरिका और यूरोप के रेगुलेशंस में अंतर आता है, तो भारतीय फर्मों को अलग-अलग मार्केट के हिसाब से कम्प्लायंस (Compliance) पर खर्च बढ़ाना पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए संकेत
अगले कुछ महीनों में यह देखना होगा कि क्या अन्य अमेरिकी विभाग, जैसे 'डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस', भी इस शब्दावली को अपनाते हैं या नहीं। निवेशकों को सलाह है कि वे भारतीय IT कंपनियों के मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजर रखें ताकि यह समझ सकें कि अमेरिका की इस नई 'इनोवेशन-फर्स्ट' नीति का उनके प्रोजेक्ट पाइपलाइन पर क्या असर पड़ रहा है।
