अमेरिका की 126% सोलर ड्यूटी: भारत के एक्सपोर्ट पर बड़ा संकट
अमेरिका के वाणिज्य विभाग (US Department of Commerce) ने भारत से आने वाली क्रिस्टलाइन सिलिकॉन फोटोवोल्टेइक (CSPV) सेल्स और मॉड्यूल्स पर 126% की शुरुआती प्रतिपूरक ड्यूटी (CVD) लगाने का ऐलान किया है। विभाग का कहना है कि भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को सरकार से अनुचित सब्सिडी (Subsidies) मिल रही है, जिससे बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा (Fair Competition) बिगड़ रही है। यह कदम साफ ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव (Trade Friction) को बढ़ाता है।
शेयर बाजार में हाहाकार: कंपनियों के स्टॉक गिरे
इस फैसले का भारतीय सोलर कंपनियों पर तुरंत असर देखने को मिला। शेयर बाजार में Waaree Energies के शेयर 15% तक गिर गए, Premier Energies में 6% से 18% तक की गिरावट आई, वहीं Vikram Solar के शेयर भी 5.92% से 7.8% तक फिसल गए। यह गिरावट साफ दर्शाती है कि भारतीय सोलर एक्सपोर्ट सेक्टर अमेरिकी बाजार पर कितना निर्भर है।
मिनिस्टर की सफाई और ट्रेड डील का सवाल
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस मामले पर कहा है कि यह ड्यूटी भारत-अमेरिका ट्रेड डील (Trade Deal) से बाहर है और स्थिति अभी 'तरल' (Fluid) बनी हुई है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि सरकार घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, यह कदम अमेरिकी सोलर मैन्युफैक्चरर्स (Manufacturers) की याचिकाओं के जवाब में उठाया गया है, जो कम कीमत वाले इम्पोर्ट्स से अपने घरेलू उद्योग को बचाने की मांग कर रहे थे। अमेरिकी सरकार का अनुमान है कि भारतीय कंपनियों को 125.87% तक की सब्सिडी मिल रही है।
90% से ज्यादा एक्सपोर्ट पर खतरा, एडवर्स एक्शन का असर
आंकड़ों के मुताबिक, 2021 से 2024 के बीच भारत के कुल सोलर मॉड्यूल एक्सपोर्ट का 90% से ज्यादा हिस्सा अमेरिका को जाता था। 126% की ड्यूटी के बाद अमेरिकी बाजार भारतीय निर्माताओं के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य (Economically Unviable) नहीं रह जाएगा। इस जांच से Adani Group की कंपनियों, मुंद्रा सोलर पीवी (Mundra Solar PV) और मुंद्रा सोलर एनर्जी (Mundra Solar Energy) के हटने के बाद, उन पर 'एडवर्स फैक्ट्स अवेलेबल' (Adverse Facts Available) विधि लागू की गई, जिससे ड्यूटी की दरें सबसे ऊंची रहीं।
आगे की राह: घरेलू मांग पर फोकस या नई रणनीति
6 जुलाई 2026 तक अंतिम फैसला आने की उम्मीद है, साथ ही एक डंपिंग-विरोधी (Anti-dumping) जांच भी चल रही है। हालांकि, भारत के सोलर सेक्टर का लॉन्ग-टर्म आउटलुक (Long-term Outlook) मजबूत घरेलू मांग और सरकारी नीतियों के कारण बेहतर बना हुआ है। लेकिन एक्सपोर्ट-केंद्रित (Export-oriented) कंपनियों को अब अपनी रणनीति बदलनी होगी, या तो घरेलू बाजार पर ज्यादा ध्यान देना होगा या तीसरे देशों में मैन्युफैक्चरिंग बेस स्थापित करने पर विचार करना होगा।