अमेरिका ने ईरान समर्थित एक अवैध शिपिंग नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए चार भारतीय कंपनियों और कई व्यक्तियों पर प्रतिबंध (Sanctions) लगाए हैं। इन पर ईरान और रूस के तेल की तस्करी में शामिल होने का आरोप है। इस फैसले से फारस की खाड़ी में काम करने वाले 18,000 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत सरकार ने अपने नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निगरानी शुरू कर दी है।
अमेरिका की नई पाबंदियां
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने मोहम्मद होसैन शमखानी द्वारा कथित तौर पर चलाए जा रहे एक ग्लोबल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के खिलाफ अपनी पाबंदियों का दायरा बढ़ा दिया है। इस कार्रवाई से भारत से जुड़ी कंपनियों और व्यक्तियों पर खास तौर पर नजर रखी जा रही है। हाल के महीनों में लगाए गए इन प्रतिबंधों में मुंबई और चेन्नई की कई कंपनियों और व्यक्तियों के नाम शामिल हैं। इन पर अमेरिका की नीतियों का उल्लंघन करते हुए ईरान और रूस के तेल की आवाजाही में मदद करने का आरोप है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि यह नेटवर्क ईरानी सरकार के लिए आय का एक बड़ा स्रोत है और माल की उत्पत्ति को छिपाने के लिए फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल करता है।
भारतीय शिपिंग कंपनियों पर असर
इस सूची में मुंबई की फ्लीट टैंको प्राइवेट लिमिटेड (Fleet Tanqo Private Limited) और चेन्नई की हाउस ऑफ शिपिंग प्राइवेट लिमिटेड (House of Shipping Private Limited) का चेन्नई ऑफिस शामिल हैं। साथ ही, सी लीड शिपिंग एजेंसी (Sea Lead Shipping Agency) का भी नाम आया है, जिसके मुंबई से तार जुड़े हैं। इसे नेटवर्क के कंटेनरीकृत शिपिंग ऑपरेशन्स का हिस्सा बताया गया है। ऐसे प्रतिबंधों के कारण अक्सर अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में आने वाली संपत्तियां फ्रीज कर दी जाती हैं और इन कंपनियों की ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम के साथ लेन-देन करने की क्षमता सीमित हो जाती है। अमेरिकी ट्रेजरी ने भारतीय नागरिकों, जिनमें चेतन प्रकाश बाल्होत्रा, तंजोर सुनीलकुमार श्रीनिवास, जिजिन जॉर्ज और गौतम विश्वदीप शामिल हैं, पर भी इन ऑपरेशन्स और जहाजों के समन्वय के प्रबंधन में भूमिका निभाने का आरोप लगाया है।
समुद्री क्षेत्र के लिए जोखिम
पूरे समुद्री लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए सबसे बड़ा जोखिम होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास काम करने वाले जहाजों पर बढ़ी हुई जांच है। अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों द्वारा अनुपालन जांच (Compliance checks), बंदरगाहों में प्रवेश पर प्रतिबंध और कड़ी निगरानी से वैध व्यापार मार्ग बाधित हो सकते हैं। इस क्षेत्र में 18,000 से अधिक भारतीय नाविकों की उपस्थिति इस स्थिति को और संवेदनशील बनाती है, क्योंकि चालक दल के सदस्यों का अक्सर जहाज के मालिकों या चार्टर करने वालों के परिचालन या वित्तीय निर्णयों पर सीमित नियंत्रण होता है।
सरकारी सुरक्षा उपाय
परिचालन में देरी और सुरक्षा खतरों की आशंका को देखते हुए, भारत के पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (Ministry of Ports, Shipping and Waterways) ने 'सीफेरर-फर्स्ट' (Seafarer-First) पहल शुरू की है। यह कार्यक्रम फारस की खाड़ी में काम करने वाले जहाजों पर भारतीय चालक दल की ट्रैकिंग पर केंद्रित है ताकि उनके कल्याण को सुनिश्चित किया जा सके। सरकार प्रभावित नाविकों की सहायता के लिए एक रियल-टाइम मॉनिटरिंग डैशबोर्ड का उपयोग कर रही है और संपर्क अधिकारियों की नियुक्ति कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य उन श्रमिकों के लिए एक सुरक्षा जाल प्रदान करना है जो अपने नियोक्ताओं या उनके द्वारा सेवा किए जाने वाले जहाजों की प्रतिबंधित स्थिति के कारण फंस सकते हैं या प्रशासनिक देरी का शिकार हो सकते हैं।
निवेशकों और समुद्री लॉजिस्टिक्स सेक्टर के हितधारकों को इन प्रतिबंधों की प्रगति और भारतीय सरकार द्वारा जारी किए गए किसी भी आगे के नियामक अनुपालन की निगरानी करनी चाहिए। प्रभावित कंपनियों की इन कानूनी चुनौतियों से निपटने की क्षमता और क्षेत्रीय शिपिंग में संभावित व्यापक व्यवधान, जैसे-जैसे अमेरिका नेटवर्क के वित्तीय ढांचे को ध्वस्त करने का अभियान जारी रखता है, ये महत्वपूर्ण कारक होंगे।
