अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) की बड़ी कार्रवाई
अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) की सालाना स्पेशल 301 रिपोर्ट में भारत को एक बार फिर बौद्धिक संपदा (IP) के संरक्षण और प्रवर्तन (enforcement) को लेकर अपनी 'प्रायोरिटी वॉचलिस्ट' में रखा गया है। यह लिस्ट भारत को चीन और रूस जैसे प्रमुख देशों के साथ रखती है, जो भारत की IP प्रैक्टिसेस पर अमेरिकी निगरानी बढ़ने का संकेत है। यू.एस. के एंबेसडर जैमीसन ग्रीर ने साफ किया है कि यू.एस. ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव दुनिया भर के अमेरिकी इनोवेटर्स की सुरक्षा के लिए अनुचित व्यापार पद्धतियों के खिलाफ प्रवर्तन टूल्स (enforcement tools) का इस्तेमाल करेगा।
IP पर यू.एस. का फोकस
USTR अगले साल इन देशों के साथ मिलकर काम करने की योजना बना रहा है। एंबेसडर रिक स्विट्जर ने जोर देकर कहा कि अमेरिकी इनोवेटर्स और ब्रांड्स को मजबूत IP संरक्षण की आवश्यकता है। यू.एस. ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव मार्केट एक्सेस इश्यूज (market access issues) से जुड़ी IP की समस्याओं को हल करने के लिए ट्रेड टॉक्स (trade talks) और अन्य चर्चाओं का सहारा लेगा।
वॉचलिस्ट में अन्य बदलाव
इसके अलावा, वियतनाम को 'प्रायोरिटी फॉरेन कंट्री' का दर्जा दिया गया है। वहीं, अर्जेंटीना और मेक्सिको ने सुधार दिखाते हुए 'वॉचलिस्ट' में जगह बनाई है, जबकि यूरोपीय संघ (European Union) को भी इसमें शामिल किया गया है। यह रिपोर्ट यू.एस. ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव द्वारा 1974 के ट्रेड एक्ट के 'सेक्शन 301' के तहत की जा रही अन्य व्यापार जांचों के साथ भी मेल खाती है, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग क्षमता से जुड़ी चिंताएं भी शामिल हैं। हाल ही में, भारत के झींगा निर्यात (shrimp exports) पर भी अमेरिकी उत्पादकों के लिए एक समान मैदान न होने का आरोप लगाते हुए सरकारी सब्सिडी को लेकर आलोचना हुई थी।
