ट्रंप प्रशासन के नए 'पब्लिक चार्ज' नियम के खिलाफ **22** राज्यों और कई शहरों ने कानूनी मोर्चा खोल दिया है। **18 सितंबर 2026** से लागू होने वाले इस नियम के तहत सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने वाले प्रवासियों को ग्रीन कार्ड मिलना मुश्किल हो सकता है।
ट्रंप प्रशासन का विवादित 'पब्लिक चार्ज' नियम 18 सितंबर 2026 को लागू होने वाला है, लेकिन इससे ठीक पहले इसे तगड़ी कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। न्यूयॉर्क, शिकागो, सैन फ्रांसिस्को और सिएटल जैसे प्रमुख शहरों के साथ 22 राज्यों के एक गठबंधन ने इस नीति को रोकने के लिए फेडरल कोर्ट में मुकदमा दायर किया है।
क्या है यह नया नियम?
यह पॉलिसी US इमीग्रेशन अधिकारियों को ग्रीन कार्ड या वीजा आवेदनों को खारिज करने की ज्यादा शक्तियां देती है। अगर अधिकारियों को लगता है कि भविष्य में व्यक्ति सरकारी सहायता (Public Assistance) पर निर्भर हो सकता है, तो उनका आवेदन ठुकराया जा सकता है। इसके दायरे में फूड असिस्टेंस और मेडिकेड जैसी सुविधाएं भी आती हैं। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग का कहना है कि यह कदम प्रवासियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए है।
राज्यों का विरोध क्यों?
मुकदमा करने वाले राज्यों का तर्क है कि यह नियम मनमाना है और इससे लोगों में डर का माहौल (Chilling Effect) पैदा होगा। लोग अपनी हक की सुविधाओं का लाभ लेने से भी कतराएंगे, जिससे स्थानीय स्वास्थ्य और पोषण कार्यक्रमों पर बुरा असर पड़ेगा और सरकारी बजट पर दबाव बढ़ेगा।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या है मायने?
स्पष्ट कर दें कि इस नियम का भारतीय शेयर बाजार (NSE, BSE) की चाल से कोई सीधा संबंध नहीं है। हालांकि, अमेरिका की वीजा नीतियों में बदलाव का असर उन IT और टेक कंपनियों पर पड़ सकता है जो अमेरिका में बड़ी तादाद में टैलेंट भेजती हैं। निवेशक इसे सीधे मार्केट से न जोड़ें, लेकिन अमेरिका में वीजा और टैलेंट मोबिलिटी के ट्रेंड को समझने के लिए इसे ट्रैक करना जरूरी है।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजरें कोर्ट के फैसले पर हैं। अगर कोर्ट इस पर स्टे (Injunction) लगा देता है, तो नियम लागू होने में देरी हो सकती है। यदि स्टे नहीं मिलता, तो 18 सितंबर से यह प्रभावी हो जाएगा। निवेशकों और प्रवासियों को अब होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की गाइडलाइंस का इंतज़ार करना होगा।
