अमेरिका ने इजरायल के लिए **$2.8 बिलियन** के हथियारों के पैकेज का ऐलान किया है, जिसमें **40,000** भारी-भरकम बम शामिल हैं। यह कदम डिफेंस सेक्टर के लिए बड़ी खबर है, लेकिन भारत के लिए क्रूड ऑयल और शिपिंग कॉस्ट को लेकर चिंताएं बढ़ा सकता है।
अमेरिकी सरकार ने आधिकारिक तौर पर इजरायल के लिए $2.8 बिलियन के आर्म्स पैकेज की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस डील में 20,000 Mk84s, 20,000 BLU-117 यूनिट्स और 20,000 I-2000 पेनेट्रेटर वॉरहेड्स जैसे घातक हथियार शामिल हैं। बता दें कि पहले बाइडेन प्रशासन ने इनके उपयोग को लेकर कुछ प्रतिबंध लगाए थे, जिन्हें अब हटा लिया गया है।
डिफेंस कंपनियों के लिए क्या हैं मायने?
इस फंडिंग के जरिए अमेरिका अपनी घरेलू डिफेंस कंपनियों से हथियारों की खरीद करेगा। इससे RTX Corporation, General Dynamics और Lockheed Martin जैसी बड़ी कंपनियों के ऑर्डर बुक्स में भारी मजबूती देखने को मिलेगी। हालांकि, दुनिया भर में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण सप्लाई चेन पर भी दबाव बना हुआ है।
भारतीय निवेशकों के लिए रिस्क
मिडिल ईस्ट में बढ़ती अस्थिरता का सीधा असर भारत पर पड़ सकता है। अगर तनाव बढ़ता है, तो कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें उछल सकती हैं, जिसका असर एविएशन, पेंट्स और केमिकल जैसे सेक्टर्स पर पड़ेगा। साथ ही, समुद्री व्यापार मार्गों में रुकावट आने से माल ढुलाई (Freight Rates) और इंश्योरेंस प्रीमियम के महंगे होने का जोखिम भी बढ़ गया है।
आगे क्या होगा?
यह प्रपोजल अभी अमेरिकी कांग्रेस की कमेटियों के पास है। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी होगी कि क्या कांग्रेस इस डील पर कोई कड़ी शर्त लगाती है या इसमें देरी होती है। फिलहाल, मार्केट की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस हथियार सप्लाई से क्षेत्र का संघर्ष और तेज होता है या नहीं, क्योंकि यही क्रूड और शिपिंग के सेंटीमेंट को तय करेगा।
