US President Donald Trump की अप्रूवल रेटिंग ऐतिहासिक निचले स्तर **32%** पर आ गई है। हिस्पैनिक वोटर्स का घटता समर्थन और ईरान के साथ संघर्ष के चलते बढ़ती महंगाई ने चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।
वोटर सपोर्ट में भारी गिरावट
Reuters/Ipsos के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की लोकप्रियता अपने करियर के सबसे निचले पायदान पर है। 3 नवंबर, 2026 को होने वाले मिडटर्म चुनावों से ठीक पहले यह सर्वे चिंताजनक संकेत दे रहा है। विशेष रूप से हिस्पैनिक वोटर्स के बीच समर्थन में बड़ी गिरावट देखी गई है, जो पहले रिपब्लिकन पार्टी के लिए एक मजबूत स्तंभ माने जाते थे। सर्वे के अनुसार, केवल 24% हिस्पैनिक वोटर ही ट्रम्प के काम से संतुष्ट हैं, जबकि 52% ने डेमोक्रेटिक प्रत्याशियों के समर्थन का मन बना लिया है।
महंगाई और आर्थिक दबाव
वोटर्स के मूड बदलने के पीछे सबसे बड़ी वजह आर्थिक अनिश्चितता है। लगातार बढ़ती महंगाई और ईरान के साथ जारी संघर्ष के कारण ईंधन की कीमतों में हुआ उछाल आम नागरिकों के बजट पर भारी पड़ रहा है। इसका असर केवल युवाओं पर ही नहीं, बल्कि 50 साल से अधिक उम्र के उन वोटर्स पर भी दिख रहा है जो अब तक रिपब्लिकन पार्टी के भरोसेमंद समर्थक थे।
ग्लोबल मार्केट पर असर
भारतीय निवेशकों और वैश्विक बाजारों के लिए यह चुनाव बेहद अहम है। अमेरिकी कांग्रेस में सत्ता का समीकरण बदलने से फिस्कल पॉलिसी, ट्रेड एग्रीमेंट और जियोपॉलिटिकल स्टेबिलिटी पर सीधा असर पड़ सकता है। यदि अमेरिकी सरकार की नीतियों में बदलाव होता है, तो इसका असर वैश्विक मार्केट सेंटीमेंट और कैपिटल फ्लो पर साफ तौर पर दिखाई देगा। निवेशक अब 3 नवंबर के नतीजों पर नजर गड़ाए हुए हैं, क्योंकि यही नतीजे राष्ट्रपति कार्यकाल के आखिरी दो वर्षों की दिशा और नीतिगत माहौल तय करेंगे।
