US-China Trade War: ट्रंप-शी मुलाकात तक टला टैरिफ का फैसला, निवेशकों की बढ़ी धड़कनें

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
US-China Trade War: ट्रंप-शी मुलाकात तक टला टैरिफ का फैसला, निवेशकों की बढ़ी धड़कनें

US सरकार ने चाइनीज सामान पर नए मैन्युफैक्चरिंग टैरिफ लगाने का फैसला फिलहाल टाल दिया है। यह कदम प्रेसिडेंट ट्रंप और चीनी नेता शी जिनपिंग की आगामी मुलाकात तक कूटनीतिक तनाव को कम करने के लिए उठाया गया है, लेकिन ट्रेड ड्यूटी के **20%** तक पहुंचने का खतरा अभी भी बरकरार है।

फैसले के पीछे की कूटनीति

अमेरिकी प्रशासन ने चीनी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी पर अपनी जांच रिपोर्ट जारी करने में देरी की है। प्रेसिडेंट ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच होने वाली महत्वपूर्ण समिट से पहले इसे एक कूटनीतिक 'ब्रेक' के तौर पर देखा जा रहा है। पहले उम्मीद थी कि अमेरिका 7.5% का नया लेवी (टैक्स) लगाएगा, लेकिन अब इसे टाल दिया गया है ताकि बातचीत से पहले कोई नया विवाद न पैदा हो।

क्यों है चिंता की बात?

यह पूरा मामला US Trade Act के Section 301 के तहत चल रही जांच का है। हालांकि बाजार की नजर 7.5% वाले संभावित टैरिफ पर थी, लेकिन असली खतरा कुल ट्रेड ड्यूटी का 20% तक पहुंचना है। अगर ऐसा होता है, तो इसका असर न केवल कंपनियों के मार्जिन पर पड़ेगा, बल्कि ग्लोबल ट्रेड कॉस्ट भी बढ़ जाएगी।

भारतीय निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

भारतीय निवेशकों और ग्लोबल मार्केट के लिए फिलहाल 'वेट एंड वॉच' की स्थिति है। यदि समिट के बाद टैरिफ बढ़ाए जाते हैं, तो ग्लोबल कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को चीन से बाहर शिफ्ट करने की गति तेज कर देंगी। हालांकि यह बदलाव लंबे समय में भारत के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन तात्कालिक रूप से ट्रेड वॉर के चलते मार्केट में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

निवेशकों को समिट के बाद आने वाले आधिकारिक बयानों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि कोई भी बड़ा बदलाव ग्लोबल सेंटीमेंट और करेंसी स्टेबिलिटी को प्रभावित कर सकता है, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ना तय है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.