अमेरिका ने भारत पर लगे अस्थायी 10% टैरिफ को बदलकर परमानेंट सेक्शन 301 टैरिफ लागू कर दिया है। इस बड़े बदलाव से भारत को पहले तय 18% की शर्तों पर फिर से बातचीत करने का मौका मिला है, हालांकि, अमेरिका की ओर से अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता पर चल रही जांच से भविष्य पर अनिश्चितता बनी हुई है।
Detailed Coverage
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध एक अहम मोड़ पर आ गए हैं। अमेरिका ने 23 जुलाई को भारत पर लगे अस्थायी 10% टैरिफ को हटाकर सेक्शन 301 के तहत एक नया, स्थायी टैरिफ लागू कर दिया है। यह कानून अमेरिका को उन व्यापारिक प्रथाओं के खिलाफ कार्रवाई करने की इजाजत देता है, जिन्हें वह अनुचित या भेदभावपूर्ण मानता है।
हालांकि, अभी के लिए टैरिफ दर 10% ही रखी गई है, यह कदम 60 देशों में जबरन श्रम के इस्तेमाल की जांच का हिस्सा है।
बातचीत में बड़ा रणनीतिक बदलाव
ट्रेड एक्सपर्ट्स इस कदम को भारतीय बातचीतकारों के लिए एक बड़ा डेवलपमेंट मान रहे हैं। पहले फरवरी 2026 तक यह समझौता था कि भारत 18% टैरिफ स्वीकार कर सकता है। लेकिन अब, क्योंकि 10% टैरिफ का कानूनी आधार बदल गया है, एनालिस्ट्स का मानना है कि भारत के पास बेहतर शर्तों के लिए मोलभाव करने का मौका है। भारत का लक्ष्य एक ऐसा द्विपक्षीय समझौता करना है जिससे उसके निर्यातकों को वियतनाम, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों की तुलना में बेहतर मार्केट एक्सेस और खास तरजीह मिल सके।
आने वाले जोखिम और अनिश्चितता
जहां यह बदलाव फिलहाल बातचीत में लचीलापन दे रहा है, वहीं अगस्त के मध्य में भारत के लिए एक बड़ी चुनौती आने वाली है। अमेरिका सेक्शन 301 के तहत ही अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता (excess capacity) पर एक अलग जांच शुरू करने वाला है। यह जांच क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड में लगे निवेशकों और बिजनेसमैन के लिए एक बड़ा मॉनिटर करने वाला फैक्टर है। अगर अमेरिका इस दूसरी जांच में भारत के जवाब से संतुष्ट नहीं होता है, तो टैरिफ को बढ़ाने का जोखिम है, जो कि इस साल की शुरुआत में चर्चा किए गए 18% के आंकड़े को पार कर सकता है।
फिलहाल, बातचीतकार और ट्रेड इकोनॉमिस्ट 'पारस्परिकता' (reciprocity) के सिद्धांत पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। रणनीति यह है कि पिछले टैरिफ समझौतों से आगे बढ़कर, भारत की बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग हब की स्थिति का फायदा उठाते हुए कम टैरिफ दर पर बातचीत की जाए, जिसके बदले में मार्केट एक्सेस बढ़ाया जा सके। निवेशक आने वाले अगस्त की कार्यवाही पर बारीकी से नजर रखेंगे, क्योंकि इसी से तय होगा कि भारत लंबे समय तक स्थिर व्यापारिक लाभ हासिल कर पाता है या आने वाले महीनों में उसे ऊंची ड्यूटी स्ट्रक्चर का सामना करना पड़ता है।
