US Markets: चुनावी नतीजों के असर से उबरे अमेरिकी बाजार, निवेशकों की नजर अब मजबूत नतीजों पर

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
US Markets: चुनावी नतीजों के असर से उबरे अमेरिकी बाजार, निवेशकों की नजर अब मजबूत नतीजों पर

4 नवंबर, 2026 को अमेरिकी बाजार में शुरुआती गिरावट के बाद रिकवरी देखी गई। कांग्रेस में डेमोक्रेटिक जीत के बाद उपजे डर को पीछे छोड़ते हुए निवेशक अब कॉर्पोरेट अर्निंग्स और फंडामेंटल्स पर फोकस कर रहे हैं, जिसका असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ रहा है।

अमेरिकी शेयर बाजार में बुधवार को मिडटर्म इलेक्शन के नतीजों के बाद काफी हलचल देखी गई। डेमोक्रेटिक पार्टी के दबदबे की खबर के बाद Nasdaq 100 जैसे प्रमुख इंडेक्स के फ्यूचर्स में शुरुआती दौर में तेज गिरावट दर्ज की गई थी। निवेशकों को डर था कि राजनीतिक अनिश्चितता और सख्त रेगुलेटरी नियम बाजार की रफ्तार को रोक सकते हैं, लेकिन सत्र के बीच में ही सेंटिमेंट बदल गया और बाजार अपनी गिरावट को थामते हुए न्यूट्रल और फिर पॉजिटिव दायरे में लौट आया।

क्यों घबराए थे निवेशक?

शुरुआती बिकवाली की मुख्य वजह यह चिंता थी कि डेमोक्रेटिक कंट्रोल वाली सरकार हाई-ग्रोथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेक्नोलॉजी सेक्टर पर रेगुलेटरी दबाव बढ़ा सकती है। निवेशक इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि नई कांग्रेस डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर और AI पर होने वाले भारी खर्च (Capital Spending) को लेकर क्या नीति अपनाती है। हालांकि, सेमीकंडक्टर स्पेस की मजबूत कंपनियों के शानदार नतीजों ने इस राजनीतिक अनिश्चितता के बीच बाजार को एक सहारा दिया है।

टेक्नोलॉजी सेक्टर पर असर

फिलहाल निवेशकों की सबसे ज्यादा नजर टेक सेक्टर पर है। बहस इस बात की है कि क्या फेडरल पॉलिसी में बदलाव से बड़ी टेक कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर चोट पहुंच सकती है। डेटा सेंटर्स की निगरानी बढ़ने और कैपिटल डिप्लॉयमेंट के सख्त नियमों के बावजूद, एडवांस्ड कंप्यूटिंग की मांग अभी भी बनी हुई है, जो इस सेक्टर को फिलहाल संभाले हुए है।

भारतीय बाजारों का हाल

भारतीय शेयर बाजार ने अमेरिकी बाजारों की इस अस्थिरता के बीच भी खुद को काफी हद तक अलग रखा है। घरेलू मोर्चे पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में नरमी और स्थानीय कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजे बाजार को मजबूती दे रहे हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का पैसा भी स्थिर बना हुआ है। अब ग्लोबल बाजार का ध्यान वापस ब्याज दरों की उम्मीदों, महंगाई के डेटा और मैक्रो-इकोनॉमिक पॉलिसी पर टिक गया है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.