US Visa Bond: अब 50 देशों के लिए $20,000 का बॉन्ड पक्का, Visa मिलना हुआ मुश्किल!

INTERNATIONAL-NEWS
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
US Visa Bond: अब 50 देशों के लिए $20,000 का बॉन्ड पक्का, Visa मिलना हुआ मुश्किल!

अमेरिका ने 50 देशों के नागरिकों के लिए $20,000 तक के वीज़ा बॉन्ड की आवश्यकता को स्थायी बना दिया है। खासकर अफ्रीका के कई देशों पर इसका असर होगा, ताकि वीज़ा की अवधि पार करने वालों पर लगाम लगाई जा सके। यह नीति पहले के पायलट प्रोग्राम की जगह लेगी और पहले ही वीज़ा आवेदनों में भारी कमी ला चुकी है।

अमेरिका का सख्त कदम: वीज़ा बॉन्ड हुआ स्थायी!

अमेरिकी सरकार ने अपने वीज़ा बॉन्ड पायलट प्रोग्राम को स्थायी रूप देने का ऐलान किया है। अब, 50 देशों के नागरिकों के लिए, खास तौर पर अफ्रीका के देशों के लिए, बिजनेस या टूरिस्ट वीज़ा (B1 और B2) के लिए अधिकतम $20,000 तक का कैश डिपॉजिट देना अनिवार्य होगा। यह एक सुरक्षा उपाय के तौर पर लिया गया है ताकि वीज़ा की अवधि खत्म होने के बाद भी लोग अमेरिका में न रुकें।

वित्तीय बोझ और आवेदन पैटर्न पर असर

इस नए नियम के तहत, पहले वाले $5,000 के मिनिमम बॉन्ड का विकल्प खत्म कर दिया गया है। अब आवेदकों को एंट्री के लिए एक ऊंची राशि की गारंटी देनी होगी। सरकार यह बॉन्ड वापस करने का अधिकार रखती है, अगर आवेदक वीज़ा नियमों का पालन करता है या उसे एंट्री नहीं मिलती। लेकिन, शुरू में ही इतनी बड़ी रकम चुकाना कई लोगों के लिए एक बड़ी रुकावट साबित हो रहा है।

आंकड़ों के मुताबिक, इस पॉलिसी का असर साफ दिख रहा है। जहाँ पहले इस प्रोग्राम से करीब 2,000 लोगों के प्रभावित होने का अनुमान था, वहीं असल में 20,000 लोग इस बॉन्ड की चपेट में आए।

इस बदलाव से अमेरिका और प्रभावित देशों के बीच यात्रा में खासी कमी आई है। रिकॉर्ड बताते हैं कि जिन लोगों से बॉन्ड मांगा गया, उनमें से लगभग 50% ने वीज़ा आवेदन ही रद्द कर दिए। इसका नतीजा यह हुआ कि इन देशों के नागरिकों के लिए बिजनेस और टूरिस्ट वीज़ा जारी होने में 83% की कमी आई है।

वजह और नियामक संदर्भ

अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि यह नीति वीज़ा की अवधि पार करने वालों की समस्या से निपटने के लिए ज़रूरी है। सरकारी अधिकारियों का अनुमान है कि ऐसे लोगों को प्रोसेस करने, गिरफ्तार करने और वापस भेजने में लगभग $18,000 प्रति व्यक्ति का खर्च आता है। इस बॉन्ड के ज़रिए, सरकार इमिग्रेशन नियमों के बेहतर पालन को सुनिश्चित करना चाहती है। इस प्रोग्राम के स्थायी होने के फैसले के पीछे एक साल की समीक्षा को वजह बताया गया है, जिसमें अधिकारियों का दावा है कि बॉन्ड अनधिकृत ठहराव को रोकने में कारगर साबित हुआ है।

हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि यह ऊंची फीस उन देशों के आवेदकों पर अनुचित वित्तीय बोझ डालती है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। इससे उन लोगों के लिए अमेरिका की यात्रा मुश्किल हो गई है जो इतनी मोटी रकम नहीं चुका सकते। यह नीति भले ही ट्रंप प्रशासन के दौरान शुरू हुई थी, लेकिन इसका जारी रहना और स्थायी होना इमिग्रेशन नियमों को सख्त करने पर सरकार के निरंतर फोकस को दिखाता है। निवेशकों और बिजनेसमैन के लिए यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि यह नीति भविष्य में यात्रा पैटर्न, पर्यटन और प्रभावित क्षेत्रों के साथ व्यापारिक जुड़ाव को प्रभावित कर सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.