Russian Oil Imports: अमेरिका के नए कानून से मचा हड़कंप, भारत के रिफाइनर्स पर **100%** टैरिफ का खतरा

INTERNATIONAL-NEWS
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Russian Oil Imports: अमेरिका के नए कानून से मचा हड़कंप, भारत के रिफाइनर्स पर **100%** टैरिफ का खतरा

अमेरिका ने 'Sanctioning Russia and Iran Act' को मंजूरी दे दी है, जिससे रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर **100%** तक टैरिफ लगाने का रास्ता साफ हो गया है। इस फैसले ने भारतीय रिफाइनर्स के मार्जिन और देश की महंगाई पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

अमेरिका ने हाल ही में 'Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026' को कानून का रूप दिया है। इस कानून के तहत अमेरिकी प्रशासन को उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है जो रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदते हैं। 18 सितंबर, 2026 को लागू हुए इस कानून के बाद नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच उच्च-स्तरीय बातचीत का दौर शुरू हो गया है, जिसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ इस मुद्दे को मजबूती से उठाया है।\n\n### रिफाइनिंग मार्जिन पर असर\n\nभारतीय निवेशकों के लिए यह स्थिति अनिश्चितता पैदा कर रही है। पिछले कुछ वर्षों में, Indian Oil Corporation (IOCL), Bharat Petroleum (BPCL), Hindustan Petroleum (HPCL) जैसी सरकारी कंपनियों के साथ-साथ Reliance Industries और Nayara Energy ने रूसी क्रूड का आयात काफी बढ़ाया है। रूसी तेल पर मिलने वाले भारी डिस्काउंट ने इन कंपनियों के रिफाइनिंग मार्जिन को सहारा दिया है। यदि अमेरिका इस कानून का इस्तेमाल करता है, तो रूसी तेल की लागत बढ़ जाएगी और इन कंपनियों को मिडिल ईस्ट या अमेरिका जैसे महंगे विकल्पों की ओर रुख करना पड़ेगा। इससे रिफाइनर्स का मुनाफा प्रभावित हो सकता है।\n\n### आर्थिक जोखिम और महंगाई\n\nअगर भारत को महंगे स्रोतों से तेल खरीदना पड़ा, तो इसका सीधा असर देश के करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) पर पड़ेगा, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही, आयात महंगा होने से देश में फ्यूल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जो महंगाई (Inflation) को और हवा देगी।\n\n### कूटनीतिक रुख और आगे का रास्ता\n\nफिलहाल यह कानून अनिवार्य नहीं है, जिससे कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की गुंजाइश बनी हुई है। भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) है। निवेशकों को अब अमेरिकी प्रशासन के अगले कदमों और रिफाइनर्स की तरफ से आने वाली डायवर्सिफिकेशन स्ट्रैटेजी पर नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.