अमेरिका में पढ़ रहे छात्रों और पत्रकारों के लिए बड़ी खुशखबरी है। एक संघीय जज ने डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के उस नियम पर रोक लगा दी है, जो वीजा की समय-सीमा तय करने वाला था। इस फैसले से लगभग **21 लाख** वीजा धारकों को बड़ी राहत मिली है।
कोर्ट का सख्त रुख
14 सितंबर 2026 को अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज एफ. डेनिस सैलर ने एक अहम आदेश जारी करते हुए डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) के उस नियम को ब्लॉक कर दिया है, जो वीजा अवधि में बड़ा बदलाव लाने वाला था। यह नियम 15 सितंबर 2026 से लागू होने वाला था, जिसमें पुराने 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' सिस्टम को खत्म कर फिक्स्ड-टर्म वीजा अनिवार्य किए जाने थे।
जज ने सरकार के तर्क को 'बेहद कमजोर' बताया है। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने उन प्रशासनिक चुनौतियों पर गौर नहीं किया जो शैक्षणिक संस्थानों के सामने आ सकती थीं। इस फैसले से 16 लाख F-वीजा धारकों और 5 लाख J-वीजा धारकों को तत्काल सुरक्षा मिली है।
भारतीय IT सेक्टर पर असर
यह खबर भारतीय निवेशकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। हालांकि यह नियम मुख्य रूप से छात्रों और एक्सचेंज वीजा के लिए था, लेकिन अमेरिकी वीजा नीतियों में बदलाव का सीधा असर भारतीय IT कंपनियों के सेंटीमेंट पर पड़ता है। भारतीय फर्म्स का कामकाज काफी हद तक टैलेंट की ग्लोबल आवाजाही पर निर्भर करता है।
हार्वर्ड और MIT जैसे बड़े संस्थानों ने भी इस कदम का स्वागत किया है, क्योंकि उनका तर्क था कि इस नियम से अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नामांकन में भारी गिरावट आती और यूनिवर्सिटीज पर करोड़ों डॉलर का प्रशासनिक बोझ बढ़ जाता।
भविष्य की चिंताएं
फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। यह एक 'प्रारंभिक निषेधाज्ञा' (Preliminary Injunction) है, जिसका मतलब है कि सरकार भविष्य में इसे मजबूत तर्कों के साथ फिर से पेश कर सकती है या ऊपरी अदालत में अपील कर सकती है। निवेशकों को सलाह है कि वे अमेरिकी वीजा नीतियों से जुड़े अपडेट्स पर नजर रखें, क्योंकि यह भारतीय टेक्नोलॉजी सेक्टर की वोलेटिलिटी (Volatility) को प्रभावित करने वाला बड़ा फैक्टर है।
