भारत-अमेरिका व्यापार संधि: US के लिए खुला बाज़ार, इंडिया पर 18% टैरिफ़ जारी!

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AuthorNeha Patil|Published at:
भारत-अमेरिका व्यापार संधि: US के लिए खुला बाज़ार, इंडिया पर 18% टैरिफ़ जारी!
Overview

भारत और अमेरिका के बीच हुए एक अहम ट्रेड एग्रीमेंट (Trade Agreement) के तहत, भारत अब अमेरिका से आने वाले लगभग सभी इंडस्ट्रियल (Industrial) और एग्रीकल्चरल (Agricultural) गुड्स पर अपना टैरिफ़ (Tariff) खत्म कर रहा है। वहीं, अमेरिका भारतीय सामानों पर अपना रेसिप्रोकल टैरिफ़ (Reciprocal Tariff) घटाकर **18%** पर ला रहा है, जो कि पहले **50%** तक था। इस डील से अमेरिकी निर्यातकों को बड़ा फायदा होगा, जबकि अमेरिका अपने विशाल ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) को कम करने के लिए **18%** की दर बनाए रखेगा। इस समझौते में भारत की ऊर्जा खरीद नीति में बदलाव और कुछ अहम घरेलू सेक्टर्स की सुरक्षा भी शामिल है।

टैरिफ़ में बड़े बदलाव: अमेरिका को राहत, भारत को संतुलन

इस बड़े व्यापारिक समझौते में सबसे अहम है टैरिफ़ (Tariff) में हुए बदलाव। भारत अब अमेरिका से आने वाले लगभग 98-99% इंडस्ट्रियल और एग्रीकल्चरल गुड्स पर लगने वाले टैरिफ़ को पूरी तरह से खत्म कर रहा है। पहले अमेरिकी इंडस्ट्रियल गुड्स पर औसतन 13.5% का टैरिफ़ लगता था, जिसे अब शून्य कर दिया गया है। इसके विपरीत, अमेरिका भारतीय सामानों पर रेसिप्रोकल टैरिफ़ (Reciprocal Tariff) को 50% तक की पिछली दरों से घटाकर 18% की बेसलाइन पर रखेगा। अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव Jamieson Greer ने इस कदम के पीछे भारत के साथ अमेरिका के विशाल व्यापार घाटे ($45.8 बिलियन 2024 में) का हवाला दिया है। यह असमानता अमेरिका की उस रणनीति को दर्शाती है, जिसमें वह मार्केट एक्सेस (Market Access) में रियायतें लेते हुए अपने व्यापार घाटे को नियंत्रित करना चाहता है।

जियोपॉलिटिकल मोड़ और संवेदनशील सेक्टर्स की सुरक्षा

इस समझौते का एक अहम पहलू भारत की ऊर्जा खरीद नीति में आया बदलाव है। भारत ने रूसी तेल की खरीद को सीमित करने पर सहमति जताई है, जो कि अमेरिका के लिए एक बड़ा मुद्दा था। इससे अमेरिका से तेल और गैस के एक्सपोर्ट्स (Exports) के नए रास्ते खुल सकते हैं। वहीं, अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ एग्रीकल्चर Brooke Rollins ने बताया कि इस डील से भारत में अमेरिकी कृषि उत्पादों के एक्सपोर्ट्स (Farm Exports) बढ़ेंगे। 2024 में भारत के साथ अमेरिका का कृषि व्यापार घाटा $1.3 बिलियन था, जिसे यह डील कम करने में मदद कर सकती है। दूसरी ओर, भारतीय डीलर्स ने कुछ संवेदनशील घरेलू सेक्टर्स, जैसे डेरी (Dairy) और अनाज (Cereals), सोयाबीन (Soybean) जैसे कृषि उत्पादों को बड़े मार्केट ओपनिंग कमिटमेंट्स (Market Opening Commitments) से बचाने में सफलता पाई है। भारत की ओर से ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में $500 बिलियन से अधिक के अमेरिकी गुड्स और सर्विसेज (Goods and Services) की खरीद की महत्वाकांक्षी प्रतिबद्धता भी इस डील का हिस्सा है।

निर्यातकों को राहत, लेकिन भविष्य अनिश्चित

भारत के लिए 18% का यह नया टैरिफ़ रेट (Tariff Rate) उसे वियतनाम (20%), बांग्लादेश (20%) और पाकिस्तान (19%) जैसे क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में अमेरिकी बाज़ार में बेहतर स्थिति में रखता है। भारतीय एक्सपोर्टर्स (Exporters), खासकर टेक्सटाइल (Textile) और लेदर (Leather) जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स (Labor-Intensive Sectors) के लिए, 50% से 18% तक की यह कमी एक बड़ी राहत है। हालांकि, एनालिस्ट्स (Analysts) का कहना है कि भारत का औसतन लगाया गया टैरिफ़ रेट 13.8% है, जो अमेरिका के 3.3% के मुकाबले काफी ज़्यादा है। वहीं, भारत के एग्रीकल्चर टैरिफ़ रेट 32.8% (भारित औसत) तक जाते हैं, जबकि अमेरिका का एग्रीकल्चर टैरिफ़ 5% है। इस डील को कुछ लोग 'ट्रेड डील' (Trade Deal) बता रहे हैं, न कि एक कॉम्प्रिहेंसिव एग्रीमेंट (Comprehensive Agreement), जिससे भविष्य में इसमें बदलाव की गुंजाइश बनी रहती है, जैसा कि पूर्व में देखा गया है। अमेरिका द्वारा 18% का टैरिफ़ बनाए रखना उसके व्यापार घाटे को लेकर अपनी चिंताओं को दर्शाता है।

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