मनीला में चल रहे आसियान समिट (ASEAN summit) के बीच अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो (Marco Rubio) और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) के बीच अहम बातचीत हुई है। दोनों देश भारतीय सामानों पर लगने वाले अमेरिकी टैरिफ (US tariffs) को कम करने के लिए एक अंतरिम व्यापार समझौते (interim trade agreement) के अंतिम चरण में पहुंच गए हैं।
Detailed Coverage
टैरिफ पर बड़ी राहत की ओर भारत और अमेरिका
अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, फिलीपींस की राजधानी मनीला में आसियान देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक के इतर एक अंतरिम व्यापार समझौते पर मुहर लगाने के करीब हैं। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य भारतीय उत्पादों पर लगने वाले अमेरिकी आयात शुल्क (US tariffs) को कम करना है।
हालांकि, अभी टैरिफ में कितनी कटौती होगी और यह कब से लागू होगा, इस पर आधिकारिक घोषणा बाकी है। लेकिन, सूत्रों के मुताबिक, बातचीत अंतिम दौर में है। अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने भी इस बात की पुष्टि की है कि दोनों देश इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। भारतीय निवेशकों के लिए यह खबर बेहद अहम है। माना जा रहा है कि इस समझौते से टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और केमिकल जैसे सेक्टरों में भारतीय कंपनियों की एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस (export competitiveness) बढ़ेगी, क्योंकि इन सेक्टर्स को अमेरिका में लंबे समय से टैरिफ की बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक रणनीति पर भी चर्चा
द्विपक्षीय व्यापार के अलावा, मनीला समिट में क्षेत्रीय स्थिरता पर भी खास तौर पर चर्चा हुई। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर मार्को रुबियो ने ईरान को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने इस महत्वपूर्ण शिपिंग लेन पर टोल लगाने या इसे नियंत्रित करने की कोशिश की, तो यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करेगा। रुबियो ने दक्षिण चीन सागर (South China Sea) के विवादों का भी जिक्र किया और कहा कि शिपिंग मार्गों में किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक सप्लाई चेन (global supply chains) और ऊर्जा की कीमतों पर भारी असर डाल सकती है। यह भारत के औद्योगिक उत्पादन के लिए भी चिंता का विषय है।
इसके साथ ही, रुबियो ने क्वाड (Quad) देशों - ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत - के प्रतिनिधियों के साथ भी मुलाकात की। इस मुलाकात में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक स्वतंत्र और खुले समुद्री मार्ग को बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। समुद्री सुरक्षा पर जोर देना इस बात को रेखांकित करता है कि व्यापारिक मार्गों का सुचारू संचालन कितना महत्वपूर्ण है, जो सीधे तौर पर भारत के आयात-निर्यात और ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करता है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
निवेशकों को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) से आने वाले अगले आधिकारिक बयानों पर नजर रखनी चाहिए। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि टैरिफ कटौती के दायरे में कौन-कौन से सामान शामिल होंगे और यह समझौता कब लागू होगा। इस अंतरिम समझौते में शामिल वस्तुओं की अंतिम सूची से ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि किन घरेलू उद्योगों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच का सबसे अधिक लाभ मिलेगा। इसके अलावा, भू-राजनीतिक माहौल, खासकर मध्य पूर्व की स्थिति और शिपिंग लागत व कच्चे माल की कीमतों पर इसका असर, बाजार की चाल और कंपनियों के मुनाफे पर असर डाल सकता है।
