US State Department ने 50 देशों के नागरिकों के लिए अनिवार्य वीजा बॉन्ड प्रोग्राम लागू किया है। अब इन देशों के लोगों को B1/B2 वीजा के लिए **$10,000** से **$20,000** तक जमा करने होंगे, लेकिन भारत को इस नियम से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
नियम का दायरा और प्रक्रिया
अमेरिकी सरकार ने उन देशों को निशाना बनाया है जहां से वीजा ओवरस्टे (Visa Overstay) के मामले ज्यादा देखे गए हैं। इस नई पॉलिसी के तहत, कांसुलर अधिकारियों के पास अब यह अधिकार है कि वे आवेदनकर्ताओं से $10,000, $15,000 या $20,000 का रिफंडेबल बॉन्ड मांग सकते हैं। इसके लिए DHS Form I-352 भरना अनिवार्य है और पेमेंट Pay.gov प्लेटफॉर्म के जरिए होगा। यह ध्यान रखना जरूरी है कि बॉन्ड जमा करने का मतलब वीजा मिलना बिल्कुल नहीं है; फैसला इंटरव्यू के दौरान ऑफिसर ही करेगा।
भारतीय कंपनियों के लिए क्या है फायदा?
यह नियम बांग्लादेश, नेपाल और भूटान जैसे पड़ोसी देशों पर लागू होता है, लेकिन भारत का नाम इस लिस्ट में नहीं है। यह भारतीय IT सेक्टर, कंसल्टिंग और इंजीनियरिंग फर्मों के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि उन्हें अब बिजनेस मीटिंग्स या कॉन्फ्रेंस के लिए जाने पर इन भारी-भरकम बॉन्ड्स और जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा।
यात्रा पर सख्त पाबंदियां
जिन देशों को इस बॉन्ड के दायरे में रखा गया है, उनके लिए यात्रा के नियम भी बेहद सख्त कर दिए गए हैं। इन यात्रियों को केवल कमर्शियल फ्लाइट्स से ही यात्रा करनी होगी और प्री-क्लियरेंस फैसिलिटीज का उपयोग करना होगा। चार्टर्ड प्लेन या लैंड बॉर्डर से एंट्री पर पाबंदी है। अगर कोई भी नियम टूटता है, तो पूरा बॉन्ड अमाउंट जब्त किया जा सकता है और अमेरिकी प्रशासन इसकी जांच भी कर सकता है।
