अमेरिका की हाउस रूल्स कमेटी एक ऐसे बिल पर विचार कर रही है, जो राष्ट्रपति को रूस से एनर्जी खरीदने वाले देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, पर **100%** तक टैरिफ लगाने का अधिकार दे सकता है। फिलहाल यह एक कानूनी फ्रेमवर्क तैयार करने की प्रक्रिया है।
अमेरिकी हाउस रूल्स कमेटी 14 सितंबर, 2026 को 'Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026' पर विचार करने वाली है। 7 अगस्त, 2026 को अमेरिकी सीनेट से पास हो चुके इस बिल ने भारतीय एक्सपोर्टर्स की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
क्या यह तुरंत लागू होगा?
निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि यह बिल ऑटोमैटिक तरीके से टैरिफ नहीं लगाता है। यह बिल अमेरिकी राष्ट्रपति को एक 'पावर' (अधिकार) देता है, जिससे वे जरूरत पड़ने पर इन देशों से आयातित सामानों पर 100% तक ड्यूटी लगा सकें। यह फिलहाल एक नीतिगत तैयारी है, न कि तत्काल प्रभाव से लागू होने वाला कानून।
किन सेक्टरों पर मंडरा रहा खतरा?
भारत का अमेरिका के साथ करीब $80 बिलियन का मर्चेंडाइज ट्रेड है। यदि यह कानून लागू होता है और इसका इस्तेमाल किया जाता है, तो फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, ऑटो कंपोनेंट्स, इंजीनियरिंग गुड्स, केमिकल्स और जेम्स एंड ज्वेलरी जैसे क्षेत्रों पर गहरा असर पड़ सकता है। इससे इन सामानों की कीमत अमेरिकी मार्केट में बढ़ जाएगी, जिससे भारतीय एक्सपोर्टर्स की कॉम्पिटिटिवनेस प्रभावित होगी।
अमेरिका में भी बिल का विरोध
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका के भीतर भी इस कदम को लेकर भारी विरोध है। US Chamber of Commerce और National Retail Federation जैसे दिग्गज संगठनों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के टैरिफ से अमेरिका में महंगाई बढ़ सकती है और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है, और इस मामले पर राजनयिक बातचीत अभी भी जारी है। मार्केट एक्सपर्ट्स अब हाउस कमेटी की मीटिंग पर नजर गड़ाए हुए हैं।
