अमेरिका में नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले ईंधन की रिकॉर्डतोड़ कीमतों ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। रिपब्लिकन उम्मीदवार अब ईरान संघर्ष पर अपनी पुरानी रणनीति से पीछे हट रहे हैं और गैस टैक्स में कटौती की मांग कर रहे हैं, जिससे ग्लोबल एनर्जी मार्केट में हलचल बढ़ सकती है।
महंगाई और आसमान छूती ईंधन की कीमतों ने अमेरिकी राजनीति की तस्वीर बदल दी है। नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव (Midterm Elections) के मद्देनजर, वर्तमान प्रशासन की अप्रूवल रेटिंग गिरकर 32% पर आ गई है, जिससे रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं के सामने अस्तित्व का संकट पैदा हो गया है। अब चुनावी मैदान में उतरने वाले उम्मीदवार ईरान के साथ चल रहे तनाव पर अपनी पुरानी नीतियों से दूरी बना रहे हैं।
प्रमुख नेताओं का बदला रुख
मिशिगन से सीनेट उम्मीदवार माइक रोजर्स (Mike Rogers) ने अब युद्ध के जल्द अंत की वकालत की है। उन्होंने सीधे तौर पर बढ़ती एनर्जी कीमतों को युद्ध से जोड़ते हुए संघीय और राज्य स्तर पर गैस टैक्स में छूट देने की मांग की है। वहीं, आयोवा में रिपब्लिकन प्रतिनिधि एशले हिन्सन (Ashley Hinson) भी अब रक्षात्मक रुख अपना रही हैं। उन्होंने डीजल निर्यात पर अस्थायी रोक लगाने और गैस टैक्स में राहत देने की बात कही है, क्योंकि वहां का कृषि सेक्टर ईंधन की कीमतों से सबसे ज्यादा प्रभावित है।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स के लिए रिस्क
निवेशकों के लिए यह राजनीतिक बदलाव महत्वपूर्ण है। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा एनर्जी प्रोड्यूसर और कंज्यूमर है, ऐसे में अगर वहां गैस टैक्स हॉलिडे या एक्सपोर्ट पॉलिसी में बदलाव होता है, तो इसका सीधा असर ग्लोबल कमोडिटी प्राइसेस पर पड़ेगा।
सात महीने से जारी यह संघर्ष अब पूरी तरह से आर्थिक बहस का केंद्र बन चुका है। बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि इन राजनीतिक वादों को विधायी कदमों में बदला गया, तो दुनिया भर में इंफ्लेशन के आंकड़ों और क्रूड ऑयल की कीमतों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिल सकता है।
