अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने G7 समिट के दौरान हुई एक हाई-प्रोफाइल प्रेस इवेंट का खुलासा किया है, जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मौजूद थे। Gor के मुताबिक, भारत की ओर से तय प्रोटोकॉल के तहत कोई सवाल-जवाब नहीं होना था, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने अचानक प्रेस को सवाल पूछने की इजाजत दे दी, जिससे यह एक **45 मिनट** की प्रेस कॉन्फ्रेंस बन गई।
अचानक बदला माहौल: क्यों हुआ प्रोटोकॉल का उल्लंघन?
US Ambassador to India, Sergio Gor, ने हाल ही में Economic Times World Leaders Forum में इस घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जून 2026 में हुई G7 समिट के दौरान, भारत के विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) ने मीडिया ब्रीफिंग को 'नो-क्वेश्चन' फॉर्मेट तक सीमित रखने का अनुरोध किया था। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी शुरुआत में इस पर हामी भरी थी।
जब ट्रंप ने लिए अप्रत्याशित फैसले
लेकिन, जैसे ही यह इवेंट मीडिया के सामने शुरू हुआ, राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद ही पत्रकारों को सवाल पूछने के लिए आमंत्रित कर दिया। Gor ने इसे एक उदाहरण के तौर पर पेश किया कि कैसे बड़े डिप्लोमैटिक इवेंट्स में तय योजनाएं कभी-कभी बदल जाती हैं।
भारत-अमेरिका संबंधों पर नजर
हालांकि भारत सरकार की ओर से इस खुलासे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह घटना दोनों देशों के लीडरशिप के बीच कम्युनिकेशन स्टाइल के अंतर को दिखाती है। G7 समिट द्विपक्षीय संबंधों, ट्रेड एग्रीमेंट्स और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण थी, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री सुरक्षा जैसे मसलों पर।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की सक्रियता के बीच, ऐसे डिप्लोमैटिक इंटरैक्शन पॉलिसी की स्थिरता और ट्रेड व डिफेंस पार्टनरशिप को समझने में मदद करते हैं।
