अमेरिका में ग्रीन कार्ड पाने की कोशिश कर रहे भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। फाइनेंशियल ईयर 2026 के पहले हाफ (H1 FY26) में EB-1A कैटेगरी के लिए अप्रूवल रेट घटकर **35%** रह गया है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर 2025 में **49.1%** था।
'असाधारण क्षमता' वालों के लिए भी मुश्किल
EB-1A वीजा उन प्रोफेशनल्स के लिए है जिनमें 'असाधारण क्षमता' (extraordinary abilities) हो। इस कैटेगरी में भी भारतीयों के लिए अप्रूवल रेट में भारी गिरावट देखी गई है। चालू फाइनेंशियल ईयर के पहले दो तिमाहियों में, भारतीय नागरिकों द्वारा फाइल की गई 7,316 पिटीशंस में से केवल 2,571 को मंजूरी मिली, जबकि 1,131 को रिजेक्ट कर दिया गया।
EB-2 वीजा कोटा भी खत्म
मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं। फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए EB-2 इमिग्रेंट वीजा कोटा भी भारतीयों के लिए समाप्त हो गया है। US डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट ने पुष्टि की है कि अक्टूबर 2026 में नया फाइनेंशियल साइकल शुरू होने तक भारतीयों के लिए कोई EB-2 वीजा जारी नहीं किया जाएगा। इस दोहरी मार - असाधारण क्षमता वाले वीजा पर कड़ी जांच और अन्य एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड कैटेगरी में कोटा की सीमा - ने अमेरिका में काम कर रहे स्किल्ड वर्कर्स के लिए अनिश्चितता बढ़ा दी है।
IT कंपनियों पर क्या होगा असर?
यह इमिग्रेशन ट्रेंड भारतीय IT सर्विसेज कंपनियों जैसे TCS, Wipro और Tech Mahindra के लिए चिंता का विषय है। ऐतिहासिक रूप से, ये कंपनियां अपने स्किल्ड कर्मचारियों को विभिन्न वीजा पर अमेरिका में क्लाइंट साइट्स पर भेजती रही हैं। वीजा मिलना मुश्किल और महंगा होने के कारण, इन कंपनियों के ऑपरेशनल कॉस्ट (operational costs) में वृद्धि का जोखिम है। यदि कंपनियां वीजा की कमी या देरी के कारण सही टैलेंट को क्लाइंट लोकेशन पर नहीं भेज पातीं, तो प्रोजेक्ट में देरी हो सकती है या उन्हें सर्विस-लेवल एग्रीमेंट (SLAs) को पूरा करने के लिए अमेरिका में महंगे लोकल टैलेंट को हायर करना पड़ सकता है।
कंपनियां बदल रहीं हैं रणनीति
इन जोखिमों को कम करने के लिए, कई बड़ी भारतीय IT कंपनियां अपनी रणनीति बदल रही हैं। वे अमेरिका में 'लोकल हायरिंग' (local hiring) बढ़ा रही हैं और ऑफशोर डिलीवरी सेंटर्स को मजबूत कर रही हैं ताकि वीजा पर निर्भरता कम हो सके। हालांकि, यह बदलाव एक रात में नहीं हो सकता और इसमें समय लगता है।
IT सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों को आने वाली तिमाही नतीजों में मैनेजमेंट की कमेंट्री पर ध्यान देना चाहिए। खासकर ऑनसाइट और ऑफशोर टैलेंट के मिक्स पर। यह देखना अहम होगा कि कंपनियां लोकल हायरिंग की बढ़ी हुई लागत को कैसे मैनेज कर रही हैं या मार्जिन पर इसका क्या असर पड़ रहा है। इसके अलावा, US प्रशासन की ओर से इमिग्रेशन रिफॉर्म्स (immigration reforms) या वीजा कोटा में किसी भी बदलाव पर नजर रखना भी महत्वपूर्ण होगा।
