UN सेक्रेटरी-जनरल एंटोनियो गुटेरेस ने सुरक्षा परिषद के पुराने ढांचे को आज के समय के हिसाब से बेकार बताया है। भारत लंबे समय से परमानेंट सीट की मांग कर रहा है और अब **2028-29** टर्म के लिए नॉन-परमानेंट सीट की तैयारी में जुटा है।
यूनाइटेड नेशंस के सेक्रेटरी-जनरल एंटोनियो गुटेरेस ने वैश्विक सुरक्षा ढांचे को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए सुरक्षा परिषद (Security Council) में तत्काल बदलाव की मांग की है। अपनी विदाई संबोधन में उन्होंने 1945 के दौर के स्ट्रक्चर को आज की बदलती जियोपॉलिटिकल हकीकत के लिए नाकाफी करार दिया है। गुटेरेस ने खास तौर पर अफ्रीकी देशों की हिस्सेदारी की कमी और उभरती आर्थिक शक्तियों को प्रतिनिधित्व न मिलने पर चिंता जताई है।
भारत की दावेदारी और चुनौतियां
भारत के लिए यह सिर्फ कूटनीतिक रुतबा हासिल करने की बात नहीं है, बल्कि ग्लोबल स्टेबिलिटी से जुड़ा मसला है। भारत लगातार कहता आया है कि मौजूदा सुरक्षा परिषद का ढांचा ग्लोबल इन्फ्लुएंस की हकीकत को अनदेखा करता है। भारत अभी 2028-29 के कार्यकाल के लिए नॉन-परमानेंट सीट पाने की कोशिश कर रहा है, जिसके लिए चुनाव अगले साल जून में होने हैं।
बड़ी अड़चनें और क्या हैं उम्मीदें?
हालांकि सुधार की मांग जोर पकड़ रही है, लेकिन अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और यूके जैसे परमानेंट सदस्यों की वीटो पावर बदलाव की राह में सबसे बड़ी दीवार बनी हुई है। भारत और अन्य G4 देशों के लिए असली चुनौती इन वैश्विक शक्तियों के बीच सहमति बनाना है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह के बदलाव न केवल कूटनीति, बल्कि इंटरनेशनल ट्रेड पॉलिसी और ग्लोबल सप्लाई चेन के भविष्य को भी सीधे प्रभावित करेंगे।
