संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी (IAEA) का कहना है कि ईरान की परमाणु साइट्स पर निरीक्षण जारी रहेंगे। हालांकि, ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि यह अमेरिका के साथ फाइनल डील पर निर्भर करेगा। तारीखों और जगहों पर बातचीत चल रही है, जबकि अमेरिका ने किसी भी जल्दबाजी से इनकार किया है।
IAEA का ईरान पर फोकस
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने कहा है कि ईरान की परमाणु गतिविधियों पर एजेंसी की नजर बनी रहेगी। उन्होंने जापान दौरे पर जोर देते हुए कहा कि ईरान में निरीक्षण तय हैं और इस पर ईरानी अधिकारियों से बातचीत चल रही है।
तेहरान की शर्तें
वहीं, ईरान के उप विदेश मंत्री कज़ेम ग़रीबाबादी ने साफ कर दिया है कि IAEA निरीक्षकों को संवेदनशील जगहों तक पहुँच तभी मिलेगी जब अमेरिका के साथ एक अंतिम समझौता हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सभी प्रतिबंधों को हटाने से भी जुड़ा है। ग़रीबाबादी ने यह भी बताया कि स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत के दौरान ग्रॉसी के मिलने के अनुरोध को ठुकरा दिया गया था।
हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) ने 60 दिनों की एक विंडो खोली है, जिसमें तेहरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके संवर्धित यूरेनियम भंडार जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। इन वार्ताओं के बावजूद, ईरान के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में क्षतिग्रस्त हुए परमाणु ठिकानों के निरीक्षण को लेकर कोई स्पष्ट समय-सारणी नहीं बताई है।
अमेरिका की जल्दबाजी नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने माना कि IAEA के निरीक्षक ईरान जाएंगे, लेकिन उन्होंने किसी भी तरह की जल्दबाजी से इनकार किया। दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने पुष्टि की है कि तेहरान के मिसाइल कार्यक्रम को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है और न ही होगी।
पिछले साल अमेरिका और इज़राइल की सैन्य कार्रवाइयों के बाद ईरान का IAEA के साथ सहयोग रुक गया था। सितंबर में ईरान ने निरीक्षकों की वापसी की अनुमति देने वाले एक नए ढांचे पर सहमति जताई थी, लेकिन हाल ही में बमबारी वाले ठिकानों तक पहुँच को मना कर दिया गया है। अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी बातचीत स्विट्जरलैंड में फिर से शुरू होने की उम्मीद है।
