UK-India FTA: अब बस कुछ ही महीनों की देरी! व्हिस्की और कारों पर टैरिफ घटने से भारतीय बाज़ार में हलचल

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AuthorAditya Rao|Published at:
UK-India FTA: अब बस कुछ ही महीनों की देरी! व्हिस्की और कारों पर टैरिफ घटने से भारतीय बाज़ार में हलचल
Overview

भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) अपने महत्वाकांक्षी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लागू करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसकी उम्मीद **2026** की शुरुआत में है। इस ऐतिहासिक समझौते से UK की व्हिस्की और ऑटोमोटिव एक्सपोर्ट्स पर लगने वाले टैरिफ (Tariff) में बड़ी कटौती की उम्मीद है, जिससे भारतीय बाज़ार पर असर पड़ सकता है।

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डील परवान चढ़ने को तैयार

लंबे इंतजार के बाद, भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर मुहर लग गई है और अब यह अंतिम पार्लियामेंट्री प्रोसीजर (Parliamentary Procedures) से गुजर रहा है। उम्मीद है कि 2026 की पहली छमाही तक यह डील लागू हो जाएगी। इसे UK के ब्रेक्जिट (Brexit) के बाद का सबसे अहम ट्रेड पैक्ट माना जा रहा है, जिसका लक्ष्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade) को काफी बढ़ाना है। सरकार का अनुमान है कि इससे दोनों देशों की जीडीपी (GDP) में भी मामूली बढ़ोतरी होगी।

किस सेक्टर को मिलेगा कितना फायदा?

इस FTA के तहत कई प्रमुख सेक्टर्स में टैरिफ (Tariff) में बड़ी कटौती होगी। UK के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी व्हिस्की और जिन (Gin) को लेकर है। भारत में इन पर लगने वाला 150% का इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty) घटकर तुरंत 75% हो जाएगा और अगले 10 सालों में 40% तक पहुँच जाएगा। इससे UK की व्हिस्की एक्सपोर्ट्स (Exports) में करीब £700 मिलियन की बढ़ोतरी हो सकती है।

ऑटोमोटिव सेक्टर (Automotive Sector) को भी राहत मिलेगी। UK में बनी कारों पर 100% से ज्यादा का टैरिफ घटकर 10% तक आ जाएगा, हालांकि यह कुछ कोटे (Quota) के तहत होगा। वहीं, भारतीय एक्सपोर्टर्स (Exporters) के लिए UK का बाज़ार लगभग 99% ड्यूटी-फ्री (Duty-Free) हो जाएगा, जिससे टेक्सटाइल, लेदर और ज्वैलरी जैसे सेक्टरों को फायदा होगा।

इकोनॉमिक ग्रोथ का अनुमान

सरकारी अनुमानों के मुताबिक, इस FTA से UK की जीडीपी (GDP) में 0.13% यानी करीब £4.8 बिलियन सालाना का इजाफा होगा, जबकि 2040 तक द्विपक्षीय व्यापार £25.5 बिलियन सालाना तक पहुँच सकता है।

चुनौतियाँ और चिंताएँ

लेकिन इस डील की राह में कुछ रुकावटें भी हैं। भारत में टैरिफ कट (Tariff Cut) धीरे-धीरे लागू होंगे, जबकि भारतीय एक्सपोर्टर्स को UK में तुरंत फायदा मिल जाएगा। भारत के जटिल नॉन-टैरिफ बैरियर्स (Non-tariff Barriers) जैसे रेगुलेटरीopacity, एडमिनिस्ट्रेटिव कॉम्प्लेक्सिटी (Administrative Complexity) और नियमों के लगातार न बदलने जैसी दिक्कतें UK एक्सपोर्टर्स के लिए परेशानी खड़ी कर सकती हैं।

UK के सांसदों ने सर्विसेज सेक्टर (Services Sector), खासकर लीगल सर्विसेज (Legal Services) में डील के सीमित प्रावधानों पर चिंता जताई है। इसके अलावा, UK द्वारा अपने एक्सपोर्ट सपोर्ट स्टाफ में कटौती करने की योजना भी चिंता का विषय है, क्योंकि इससे कंपनियों को भारत के मुश्किल बाज़ार में मदद मिलनी बंद हो सकती है। डील में ह्यूमन राइट्स (Human Rights), लेबर (Labour) या क्लाइमेट (Climate) जैसे मुद्दों पर कोई मजबूत कमिटमेंट (Commitment) न होना भी आलोचना का कारण बना है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.