UK सरकार ने वेस्ट बैंक के अवैध इजरायली सेटलमेंट्स से आने वाले सामान और सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि UK-Israel का कुल ट्रेड करीब **£6 बिलियन** है, लेकिन यह नया नियम बिजनेस के लिए कंप्लायंस की बड़ी चुनौतियां लेकर आया है।
नियम का दायरा और मकसद
8 सितंबर, 2026 को UK सरकार ने वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में बने अवैध इजरायली सेटलमेंट्स से आने वाले सामान पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध की घोषणा की है। प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम और विदेश सचिव एड मिलिबैंड की सरकार का कहना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करने और टू-स्टेट सॉल्यूशन की संभावनाओं को बचाए रखने के लिए उठाया गया है। यह फैसला फ्रांस और कनाडा जैसे अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ समन्वय में लिया गया है।
बिजनेस और इनवेस्टर्स पर क्या होगा असर?
यह पॉलिसी सिर्फ फिजिकल गुड्स तक सीमित नहीं है। इसमें उन सेवाओं पर भी रोक लगाई गई है जो सेटलमेंट के विस्तार में मदद करती हैं, जैसे कि कंस्ट्रक्शन, फाइनेंसिंग, रियल एस्टेट और विज्ञापन। सरकार ने उन वस्तुओं के लिए एक्सपोर्ट लाइसेंस देने से भी मना कर दिया है जो कब्जे वाली गतिविधियों में योगदान देती हैं। कंपनियों के लिए अब रीजनल ऑपरेशंस का गहरा ऑडिट करना अनिवार्य हो गया है।
सप्लाई चेन की चुनौतियां
सबसे बड़ी दिक्कत 'ग्रीन लाइन' के अंदर बने सामान और सेटलमेंट्स से आए सामान के बीच फर्क करने की है। कॉम्प्लेक्स सप्लाई चेन और कृषि उत्पादों की मिक्सिंग के कारण, कंपनियों के लिए यह तय करना मुश्किल होगा कि क्या सामान बैन की लिस्ट में आता है। इस डर से कि कहीं गलती से सेंक्शन का उल्लंघन न हो जाए, कंपनियां इस पूरे रीजन के साथ अपना व्यापार घटा सकती हैं, जिससे ऑपरेशनल कॉस्ट में इजाफा तय है।
आगे की राह
साल 2025 में दोनों देशों के बीच £6 बिलियन का व्यापार था। हालांकि इस बैन का असर कुल ट्रेड पर सीमित रहने की उम्मीद है, लेकिन इजरायल की ओर से संभावित जवाबी कार्रवाई का खतरा बना हुआ है। सरकार ने कहा है कि आने वाले 6 से 9 महीनों में इन प्रतिबंधों के लागू होने की तकनीकी बारीकियां साफ हो जाएंगी, जिस पर निवेशकों को बारीक नजर रखनी चाहिए।
