US Ambassador David Perdue ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि राष्ट्रपति Donald Trump ने Xi Jinping से अमेरिकी हथियार खरीदने को लेकर बात की थी। कानूनन इस पर रोक के बावजूद इस खबर ने ताइवान के **$14 बिलियन** के अटके हुए डिफेंस पैकेज को लेकर निवेशकों में चिंता बढ़ा दी है।
चीन में तैनात अमेरिकी राजदूत David Perdue के इस बयान ने वाशिंगटन में हड़कंप मचा दिया है। हालांकि व्हाइट हाउस ने इस तरह की किसी भी बिक्री की मंशा से इनकार किया है, लेकिन यह खुलासा दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच की अनिश्चित कूटनीति को दर्शाता है। अमेरिकी कानून के तहत चीन को सैन्य हार्डवेयर बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित है, जो इस प्रस्ताव के रास्ते में एक बड़ी कानूनी बाधा है।
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी फिक्र $14 बिलियन के उस डिफेंस पैकेज को लेकर है जो ताइवान के लिए प्रस्तावित था। सीनेट के माइनॉरिटी लीडर Mitch McConnell समेत कई सांसदों ने इस देरी पर नाराजगी जताई है। ताइवान इस समय एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में जियोपॉलिटिकल तनाव का केंद्र बना हुआ है, ऐसे में चीन के प्रति अमेरिका के रुख में किसी भी नरमी की आहट वहां की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता पैदा कर रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए इस क्षेत्र में स्थिरता बहुत जरूरी है। इन दोनों देशों के बीच बढ़ती कूटनीतिक तकरार ग्लोबल सप्लाई चेन और डिफेंस सेक्टर के सेंटीमेंट पर गहरा असर डाल सकती है। अब बाजार की नजरें सेक्रेटरी ऑफ स्टेट Marco Rubio और डिफेंस सेक्रेटरी Pete Hegseth के बयानों पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार ताइवान के लिए अटकी फंडिंग को जल्द जारी करती है या राजनीतिक दबाव के चलते यह अनिश्चितता और बनी रहती है।
